
बिजली संबंधी मांग को लेकर आज भारतीय किसान यूनियन से पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम कार्यालय में मासिक बैठक बुलाई थी। भाकियू की मासिक बैठक में सुबह से ही अन्य जिलों से किसान ट्रैक्टर—ट्रालियों में पहुंचना शुरू हो गए थे। ऊर्जा भवन में भाकियू के मासिक बैठक को देखते हुए पहले से ही सभी कमरों में ताला लगा दिया गया था। इससे भाकियू की मासिक बैठक में पहुंचे किसान भड़क उठे। किसानों ने अधिकारियों को शाम को 5 बजे तक का अल्टीमेटम दिया। लेकिन जब शाम 5 बजे तक भी किसानों के बीच अधिकारी नहीं पहुंचे और सभागार का ताला नहीं खुला तो मासिक बैठक अनिश्वितकालीन धरने में बदल गई। इसके बाद किसानों ने ऊर्जा भवन परिसर में ही कढ़ाई चढ़ा दी है।
भारतीय किसान यूनियन हापुड के जिलाध्यक्ष दिनेश खेड़ा ने कहा कि किसानों के टयूबवैल के बिल कई लाख में आ रहे हैं। जिसके कारण किसान आत्महत्या तक कर रहा है। उन्होंने कहा कि हापुड में बिजली विभाग में बहुत बड़ा बिजली बिल घोटाला हुआ था। जिसमें बिजली विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी जेल गए थे। किसानों से बिजली का बिल वसूला गया और उसकी फर्जी रसीद दी गई। पूरा घोटाला उजागर होने के बाद आज भी किसानों पर बिजली का बकाया बिल भेजा जा रहा है। जिससे किसान दहशत में हैं। उन्होंने मांग की है कि किसानों की नलकूप किताब से अविलंब फर्जी बिल खत्म किए जाए। उन्होंने कहा कि किसानों की बिजली समस्याओं के लिए बिजली विभाग द्वारा कई बार कमेटी गठित की गई। लेकिन इसका कोई हल नहीं निकलता है।
वहीं धरनारत किसानों ने कहा कि अब किसान ऊर्जा भवन से तभी उठेंगे जब तक कि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो जाता है। भाकियू पदाधिकारियों ने पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड एमडी को धरनास्थल पर बुलाने की मांग की है। ऊर्जा भवन में किसानों का अनिश्चितकालीन धरना की जानकारी आसपास के गांव के किसानों को हुई तो वे भी ट्रैक्टर ट्राली में भरकर ऊर्जा भवन पर पहुंच गए।