खास बातें लगातार फेल हो रही इंटेलीजेंसी और खुफिया विभाग दो अप्रैल 2018 को मेरठ में प्रदर्शन के दौरान फैली थी हिंसा 30 जून को बिना अनुमति के बैठक और जुलूस का हुआ आयोजन
मेरठ। मेरठ समेत पूरे पश्चिम उप्र में दो अप्रैल 2018 जैसी हिंसा की साजिश रची गई थी। यह हिंसा एक साथ कई शहरों जैसे- आगरा, मेरठ, अलीगढ़, सहारनपुर में होनी थी। लेकिन शायद ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था जिस कारण साजिशकर्ता अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सके और पश्चिम उप्र दंगे की आग में झुलसने से बच गया। इतनी बड़ी साजिश की जाती रही और पुलिस-प्रशासन और इंटेलीजेंस को भनक तक नहीं लगी। इससे पहले भी दो अप्रैल 2018 को दलितों के आह्वान पर भारत बंद का आहवान किया गया था और उस दौरान पूरे प्रदेश भर में जबरदस्त हिंसा हुई थी। मेरठ भी इस हिंसा की आग में झुलसा था। ये पहली बार था, जब इतना बड़ा अभियान शुरू किया गया और किसी भी खुफिया तंत्र को जानकारी नहीं लगी। पुलिस-प्रशासन से लेकर तमाम सरकारी तंत्र सन्न रह गए थे। जिस तरह से व्हाट्सएप मैसेंजर पर आपस में ग्रुप बनाकर सूचनाएं दी गईं और पूरा बवाल हुआ, कुछ इसी तरह से मेरठ में शांति मार्च की घटना के दौरान भी हुआ।
पश्चिम में लगातार फेल हो रहा खुफिया तंत्र
मेरठ में निकाले गए शांति मार्च को लेकर पुलिस प्रशासन के पास सूचना तीन दिन पहले से थी, लेकिन उसे खुफिया तंत्र से यह नहीं पता चल सका कि मामला इतना बढ सकता है। इसलिए वह स्थिति का आंकलन पहले से नहीं कर सका। पुलिस और प्रशासन में भी इसको लेकर तालमेल की कमी रही। रविवार शाम मेरठ में बवाल के बाद सोमवार को भी फिर से मवाना में भीड़ जुटाई गई। यहां भी प्रशासन कमजोर दिखा। इंटरनेट बंद होने के बावजूद सब कुछ मैसेंजर पर फिक्स कर दिया गया और सभी को बता भी दिया गया। इस दौरान भी व्यवस्था नहीं बन पाई और भीड़ को रोका नहीं जा सका।
इससे पहले उठा मेरठ का पलायन का मुद्दा
पश्चिम में राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र मेरठ इन दिनों काफी चर्चा में है। इससे पहले प्रहलाद नगर में पलायन का मामला गरमाया था। इसके बाद मुख्यमंत्री ने इस मामले में बयान जारी किया। पुलिस-प्रशासनिक अमला प्रहलाद नगर पहुंचा और वहां स्थिति की जांच पड़ताल की। इसके बाद से लगातार शहर का माहौल बिगड़ता चला गया। कभी धर्म परिवर्तन के नाम पर तो कभी मॉब लीचिंग को लेकर शहर में माहौल खराब किया जा रहा है। बीजेपी नेता विनीत शारदा के बताया कि रविवार को हुई घटना दुखद है। ये एक पूर्वनियोजित साजिश थी। विरोध प्रदर्शन को कोई मना नहीं करता, लेकिन तरीका हिंसात्मक नहीं होना चाहिए। ये साजिश ऐसी ही थी जैसी 2 अप्रैल 2018 को भारत बंद के दौरान हुई थी। जिसमें प्रदेश के अधिकांश जिलों में हिंसा फैली थी।