खास बातें मेरठ के टीपी नगर थाने के सामने की घटना 80 प्रतिशत झुलसे व्यापारी को दिल्ली किया रेफर एसएसपी ने 24 घंटे के भीतर मामले की मांगी रिपोर्ट
मेरठ। मेरठ पुलिस की कार्यप्रणाली से तंग आकर एक व्यापारी ने थाने के सामने पेट्रोल छिड़ककर खुद को आग लगा ली। आग लगाने के बाद व्यापारी थाने के भीतर घुस गया। जिसे देखकर पुलिसकर्मियों के रोंगटे खड़े हो गए। पुलिसकर्मियों ने जलते हुए व्यापारी पर पानी डालकर आग को बुझाया, लेकिन तब तक व्यापारी 80 प्रतिशत तक झुलस चुका था। उसको पहले मेरठ के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने के कारण उसको दिल्ली के लिए रेफर कर दिया गया। व्यापारी की हालत गंभीर बनी हुई है। व्यापारी द्वारा आग लगाने की घटना से व्यापारी संगठनों में रोष है। बुधवार की देर रात एसएसपी थाने पहुंचे और उन्होंने व्यापारी के संबंध में पूरी रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर देने के लिए कहा है। इसके लिए एसपी सिटी से उन्होंने पूरी रिपोर्ट तलब की है।
नहीं हुर्इ बैंक मैनेजर की गिरफ्तारी
मामला थाना टीपीनगर का है। व्यापारी रणजीत ने पीएनबी के मैनेजर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें उसके खाते की गोपनीयता के भंग का मामला बताया गया था। पुलिस के अनुसार मुकदमे की जांच चल रही है, लेकिन व्यापारी मैनेजर की गिरफ्तारी न होने से परेशान था। इस संबंध में वह कई बार थाने पहुंचा था। इससे पहले भी इस व्यापारी ने पानी की टंकी पर चढ़कर आत्मदाह की कोशिश की थी। बुधवार देर रात शताब्दी नगर निवासी व्यापारी रणजीत बाइक से टीपी नगर थाने पहुंचा। थाने के सामने उसने अपनी बाइक खड़ी की और उसके बाद बाइक से पेट्रोल निकालकर अपने ऊपर डाल लिया।
पुलिसकर्मियों ने आग बुझार्इ
टीपी नगर इंस्पेक्टर प्रमोद गौतम के अनुसार व्यापारी खुद को आग लगाकर थाने के भीतर चला आया। उसको झुलसते देख पुलिसकर्मियों ने पानी डालकर आग को बुझाने की कोशिश की। लेकिन तब तक व्यापारी काफी झुलस चुका था। पुलिसकर्मियों ने रणजीत को पहले जिला अस्पताल और उसके बाद उसको एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। जहां हालत गंभीर होने के कारण उसे दिल्ली रेफर कर दिया। व्यापारी के बेटे विक्की के अनुसार उसके पिता की हालत गंभीर है। इंस्पेक्टर ने बताया कि व्यापारी ने नवीन मंडी स्थित पीएनबी के मैनेजर के खिलाफ दिसंबर 2018 में खाते की गोपनीयता भंग करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे में पुलिस केस डायरी पूरी कर चुकी है। मुकदमा बैंक अधिनियम की धाराओं में लिखा गया। जिसमें गिरफ्तारी संभव नहीं थी। जबकि व्यापारी लगातार मैनेजर की गिरफ्तारी की मांग कर रहा था।