West Bengal Election : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 'मिशन 2027' के तहत मेरठ और पश्चिमी यूपी के दिग्गज नेताओं को मैदान में उतारा है। भाषा की बाधा को पार कर ये नेता बंगाली सीख रहे हैं और बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत कर रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बना लिया है। 'मिशन 2027' के व्यापक लक्ष्य के साथ, उत्तर प्रदेश के रणनीतिकारों और जमीनी नेताओं को बंगाल के मोर्चे पर उतारा गया है। इस चुनावी अभियान में मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दिग्गज नेता न केवल संगठन को मजबूती दे रहे हैं, बल्कि भाषा की बाधा को पार कर स्थानीय जनता का दिल जीतने की कोशिश भी कर रहे हैं।
भाजपा ने पश्चिम बंगाल में जीत सुनिश्चित करने के लिए अपने सबसे अनुभवी विधायकों, सांसदों और मंत्रियों की फौज तैनात की है। मेरठ, गाजियाबाद, बागपत और सहारनपुर जैसे जिलों से आए नेता बंगाल के गली-कूचों को मथ रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के जल शक्ति राज्य मंत्री दिनेश खटीक, विधान परिषद सदस्य (MLC) धर्मेंद्र भारद्वाज, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष मनोज पोसवाल और सहारनपुर के विधायक राजीव गुंबर जैसे नेता इस समय बंगाल में डेरा डाले हुए हैं।
पार्टी ने 'एक नेता, एक विधानसभा' की नीति अपनाई है। उदाहरण के तौर पर, मनोज पोसवाल को बारासात जिले की मध्यमग्राम सीट और धर्मेंद्र भारद्वाज को बैरकपुर जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनका मुख्य कार्य बूथ स्तर की कमेटियों को सक्रिय करना और स्थानीय कार्यकर्ताओं में जोश भरना है।
उत्तर प्रदेश के हिंदी भाषी नेताओं के लिए बंगाल में सबसे बड़ी चुनौती भाषा थी। संवाद की इस दूरी को पाटने के लिए भाजपा ने एक चतुर रणनीति अपनाई है। प्रत्येक नेता के साथ ऐसे स्थानीय कार्यकर्ताओं को जोड़ा गया है जो हिंदी और बंगाली दोनों भाषाओं के जानकार हैं। जनसंपर्क के दौरान जब नेता हिंदी में अपनी बात रखते हैं, तो कार्यकर्ता तुरंत उसका बंगाली अनुवाद करते हैं।
चुनावी माहौल में खुद को ढालने के लिए कई नेता अब बंगाली भाषा भी सीख रहे हैं। मेरठ के नेता मनोज पोसवाल, जो 30 जनवरी से बंगाल में सक्रिय हैं, उन्होंने काफी हद तक बंगाली बोलना सीख लिया है। 'नमस्कार' की जगह 'नमोस्कार' और स्थानीय मुहावरों के प्रयोग से वे जनता के बीच अपनी पैठ बना रहे हैं।
ये नेता घर-घर जाकर केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों का प्रचार कर रहे हैं। वे स्थानीय लोगों को यह समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि 'डबल इंजन' की सरकार बंगाल की तस्वीर बदल सकती है। बूथ पदाधिकारियों के साथ प्रतिदिन होने वाली बैठकें चुनाव प्रबंधन को और सटीक बना रही हैं।