मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की राष्ट्रीय सहसंयोजिका महिला प्रकोष्ठ मुस्लिम महिला अधिवक्ता शाहीन परवेज ने कांग्रेस, सपा, बसपा और तृणमूल के खिलाफ खोला मोर्चा
मेरठ. मुस्लिम समाज में तीन तलाक पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाए गए बिल को लेकर राज्यसभा में विरोध बना हुआ है। प्रस्तावित कानून के मुताबिक तीन तलाक लेना अवैध होगा और ऐसा करने का दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल की सजा होगी। इस बिल में महिला और बच्चों के भरण पोषण की रकम मजिस्ट्रेट द्वारा तय की जाएगी। हालांकि महिला चाहे तो समझौते का विकल्प भी खुला है। अब विपक्ष द्वारा इस बिल के विरोध को देखते हुए मुस्लिम महिलाएं भी सामने आने लगी हैं। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की राष्ट्रीय सहसंयोजिका महिला प्रकोष्ठ मुस्लिम महिला अधिवक्ता शाहीन परवेज ने कांग्रेस, सपा, बसपा और तृणमूल द्वारा राज्यसभा में बिल के विरोध करने पर नाराजगी जताई है।
उन्होंने कहा कि इस बिल पर समस्त राजनीतिक दलों को एकजुट होना चाहिए, जो इसका विरोध करेगा वह बेनकाब होगा। सभी दल जो मुस्लिम महिलाओं को सम्मान नहीं दिलवाना चाहते हैं, उनके हक की आवाज को दबाना चाहते हैं, उन्हें दर-दर की ठोकरें खिलवाना चाहते हैं, इनमें में सबसे पहले कांग्रेस, उसके बाद मायावती और ममता बनर्जी हैं। ये सभी महिलाएं हैं और इनको मुस्लिम महिलाओं के अधिकार के लिए इस बिल को पास करवाने में मदद करनी चाहिए। अगर ये महिला राजनीतिज्ञ बिल की राह में बाधा उत्पन्न करती हैं तो मुस्लिम महिलाओं के लिए उनके दिल में कोई हमदर्दी नहीं रहेगी। ये महिला नेता बेनकाब हो चुकी हैं, क्योकि यह मुस्लिम महिला विरोधी पार्टियां है। अगर इन सभी दलों की महिला नेताओं ने मुस्लिम महिला विधेयक 2018 का राज्यसभा में विरोध किया तो 2019 के चुनावों में मुस्लिम महिलाएं इन सभी दलों को सबक सिखाएंगी। इन सभी के रूख से यह साफ हो चुका है कि इन लोगों के दिल में मुस्लिम महिलाओं के प्रति हमदर्दी नहीं है।