
ललिता गौतम हत्याकांड अपडेट। फोटो सोर्स-पत्रिका न्यूज
Lalita Gautam Murder Case Row Meerut: मेरठकी BA छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड (Lalita Gautam murder case) एक बार फिर सुर्खियों में है। मई 2026 में हुई इस सनसनीखेज हत्या ने पूरे उत्तर प्रदेशको झकझोर दिया था। अब जुलाई में न्याय की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई, वायरल वीडियो और पुलिस व प्रदर्शनकारियों के अलग-अलग दावों ने इस मामले को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। जहां एक ओर प्रदर्शनकारी अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं पुलिस का कहना है कि कुछ बाहरी और अराजक तत्व आंदोलन को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में सवाल फिर उठ रहा है कि आखिर ललिता गौतम हत्याकांड में क्या हुआ था और अब यह मामला दोबारा क्यों गरमा गया है?
यह पूरा मामला मेरठ के टीपी नगर थाना क्षेत्र का है। मई 2026 में BA की छात्रा ललिता गौतम परीक्षा देकर घर लौटने के लिए निकली थीं, लेकिन देर शाम तक घर नहीं पहुंचीं। परिजनों ने पहले अपने स्तर पर रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों के यहां तलाश की, लेकिन उनका कोई पता नहीं चला। इसके बाद परिवार ने पुलिस में गुमशुदगी दर्ज कराई। उसी समय परिजनों ने अंकुश नाम के एक युवक पर शक भी जताया था।
गुमशुदगी दर्ज होने के अगले ही दिन मामले ने दर्दनाक मोड़ ले लिया। रोहटा थाना क्षेत्र के उकसिया गांव के पास गन्ने के खेत में एक युवती का अर्धनग्न शव मिलने की सूचना मिली। मौके पर पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने जांच शुरू की। बाद में शव की पहचान ललिता गौतम के रूप में हुई। इस घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया और पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी।
ललिता गौतम को न्याय दिलाने की मांग को लेकर कई सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी कमिश्नरी पार्क से कलेक्ट्रेट तक मार्च निकालना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। इसी दौरान सड़क जाम हुई और पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में ले लिया।
प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए रवि गौतम को पुलिस वाहन में बैठाया गया। इसी बीच सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ, जिसमें मेरठ के SSP अविनाश पांडेय पुलिस वैन के अंदर जाकर रवि गौतम को थप्पड़ मारते दिखाई दिए। जिसके बाद पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे।
वायरल वीडियो सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि प्रदेश में पुलिस का रवैया लगातार सवालों के घेरे में है। वहीं चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि दलित परिवार को अब तक न्याय नहीं मिला है और उन्होंने मेरठ (Meerut) पहुंचकर आंदोलन में शामिल होने की बात कही।
इसी बीच मामले में एक और नया मोड़ सामने आया। जानकारी के मुताबिक, मेरठ के SSP अविनाश पांडेय के PRO को एक कथित धमकी भरी कॉल आई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ऑडियो में एक व्यक्ति खुद को वकील बताते हुए SSP से अकेले में मिलने की बात कहता और धमकी देता सुनाई दे रहा है। ऑडियो में शख्स को कहते सुना जा सकता है,'' एक बार अकेले में कप्तान सहाब से मिलवा दो खुले मैदान में।'' हालांकि इस वायरल ऑडियो की पुष्टि पत्रिका न्यूज की टीम नहीं करती है।
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Updated on:
10 Jul 2026 12:13 pm
Published on:
10 Jul 2026 12:13 pm
