
ललिता गौतम हत्याकांड (फाइल फोटो- पत्रिका)
Lalita Gautam Murder Case: उत्तर प्रदेश के मेरठ में दलित छात्रा 'ललिता गौतम हत्याकांड' को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। अब यह हत्याकांड पूरी तरह सियासी रंग ले चुका है और मामले को लेकर लगातार विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। छात्रा को न्याय दिलाने के लिए बुलाई गई महापंचायत के दौरान कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। कांग्रेस ने एक विडियो जारी किया है जिसमें मेरठ के SSP अविनाश पांडेय पुलिस वैन में बैठे एक प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारते नजर आ रहे हैं।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव और आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद के बाद अब, यूपी कांग्रेस ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पूरी घटना का विडियो जारी करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। पोस्ट में भाजपा सरकार से सवाल पूछते हुए लिखा है कि, 'दलित बेटी की हत्या... और न्याय मांगने वालों पर डंडा!' मेरठ में दलित छात्रा की हत्या से गुस्साए लोग संविधान के दायरे में रहकर न्याय की मांग कर रहे थे। लेकिन आरोप है कि पहले से हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारी रवि गौतम के साथ SSP द्वारा मारपीट की गई। एक तरफ, दलित बेटी की हत्या दूसरी तरफ, न्याय मांगने वालों पर पुलिस की सख्ती- क्या यही कानून का राज है? अगर जनता अपनी आवाज़ भी नहीं उठा सकती, तो लोकतंत्र का अर्थ क्या रह जाता है? भाजपा सरकार जवाब दे- आख़िर पुलिस का डंडा अपराधियों पर चलेगा या न्याय मांगने वालों पर?
ललिता गौतम की हत्या के आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग को लेकर दलित संगठनों ने महापंचायत बुलाई थी। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट के गेट पर धरने पर बैठ गए और DM को बुलाने की जिद पर अड़ गए। जब हालात बिगड़ने लगे तो SSP अविनाश पांडेय ने खुद मोर्चा संभाला और माइक से लोगों को सड़क खाली करने की चेतावनी दी। जब भीड़ पीछे नहीं हटी तो पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए लाठीचार्ज कर दिया। प्रदर्शन के दौरान स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब SSP ने पुलिस वैन के अंदर मौजूद रवि गौतम नाम के एक शख्स को थप्पड़ जड़ दिए। रवि खुद को वकील बता रहा था।
मेरठ पुलिस का कहना है कि इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन में दूसरे जिलों से आए कुछ ऐसे उपद्रवी शामिल हो गए थे जिन पर पहले से ही कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस के मुताबिक इन्हीं बाहरी तत्वों ने भीड़ को उकसाने और सड़क जाम करने का काम किया। पुलिस ने इस मामले में 13 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया है जिनमें से 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पकड़े गए आरोपियों में रवि गौतम, दिग्विजय सिंह और रितिक शामिल हैं। अन्य की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।
20 वर्षीय ललिता गौतम मेरठ के टीपी नगर इलाके की गगन एंक्लेव में रहती थी और बीए की पढ़ाई कर रही थी। 15 मई को वह परीक्षा देने घर से निकली लेकिन वापस नहीं लौटी। 16 मई को परिजनों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने CCTV फुटेज खंगाले तो वह अंकुश नाम के युवक के साथ जाती दिखी। पुलिस ने जब अंकुश को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने हत्या का जुर्म कबूल कर लिया।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी अंकुश और ललिता के बीच प्रेम प्रसंग था। घटना वाले दिन अंकुश ने ललिता के फोन में कुछ अन्य चैट और तस्वीरें देख ली थीं जिससे उसे शक हुआ कि ललिता का किसी और युवक से भी संबंध है। इसी शक की वजह से उसने ललिता की हत्या कर दी और शव को रोहटा थाना क्षेत्र के गन्ने के खेत में फेंक दिया। 17 मई को पुलिस ने शव बरामद किया था। पुलिस ने मुख्य आरोपी को जेल भेज दिया है और साक्ष्य मिटाने वाले दो अन्य लोगों पर भी कानूनी कार्रवाई की है।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि कोई एक युवक अकेले इस पूरी वारदात को अंजाम नहीं दे सकता। इसमें अन्य लोग भी शामिल हैं। परिजनों ने सभी आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और उनके घरों पर बुलडोजर चलाने की मांग की है। वहीं दलित संगठनों की मांग है कि इस हत्याकांड की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराई जाए सभी दोषियों को फांसी दी जाए और पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद के साथ एक सरकारी नौकरी भी दी जाए।
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Updated on:
09 Jul 2026 01:37 pm
Published on:
09 Jul 2026 12:58 pm
