
मेरठ SSP अविनाश पांडेय (फोटो- UP Police Official Website)
Meerut SSP Avinash Pandey: मेरठ में BA छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड के बाद न्याय की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और हिरासत में लिए गए रवि गौतम के साथ मेरठ के SSP अविनाश पांडेय के कथित मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटना के बाद विपक्षी नेताओं ने पुलिस प्रशासन और सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इसी विवाद के बीच अविनाश पांडेय एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। आइए जानतें हैं अविनाश पांडेय किस कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं।
परिजनों की इसी मांग और जनाक्रोश के चलते 8 जुलाई को मेरठ कलेक्ट्रेट पर भारी विरोध प्रदर्शन किया गया। इसी प्रदर्शन के दौरान मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडेय के कई वीडियो वायरल हो गए। सबसे ज्यादा चर्चा उस वायरल वीडियो की हो रही है जिसमें पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर पुलिस वैन में बैठाया हुआ था। वीडियो में देखा जा सकता है कि एसएसपी अविनाश पांडेय वहां पहुंचते हैं और सीधे पुलिस की गाड़ी में चढ़कर अंदर बैठे एक प्रदर्शनकारी रवि गौतम पर थप्पड़ बरसाने शुरू कर देते हैं। इसके बाद वह गाड़ी का दरवाजा बंद करके भी उसे पीटते हैं। इसके अलावा वह सड़क पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ के बीच जाकर भी लोगों को थप्पड़ मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसी घटना के बाद से यह पूरा मामला तूल पकड़ चुका है।
उत्तर प्रदेश पुलिस के अनुभवी अधिकारियों में गिने जाने वाले अविनाश पांडेय का जन्म 3 फरवरी, 1988 को यूपी के लखीमपुर खीरी जिले में हुआ था। उनके पिता का नाम श्रवण कुमार पांडेय है। अविनाश पांडेय यूपी कैडर के 2015 बैच के आईपीएस ऑफिसर हैं। उन्होंने यूपीएससी (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 219 हासिल की थी। पढ़ाई की बात करें तो अविनाश पांडेय ने साइंस स्ट्रीम से ग्रेजुएशन (B.Sc.) की डिग्री हासिल की है। इसके बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी की और भारतीय पुलिस सेवा में अपनी जगह बनाई।
अपने पुलिस करियर के दौरान IPS अविनाश पांडेय ने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। करीब पांच महीने पहले ही उन्होंने मेरठ के एसएसपी का कार्यभार संभाला है। मेरठ में तैनाती से पहले वह लखनऊ में एसएसएफ वाहिनी में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा वह साल 2019 में एसपी देहात के रूप में भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। उन्होंने गाजियाबाद में एसपी सिटी और प्रयागराज महाकुंभ के दौरान भी महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद संभाले हैं।
अविनाश पांडेय इससे पहले भी अपनी सख्त कार्यशैली के चलते चर्चा में रह चुके हैं। पंजाब में एक पुलिस चौकी पर ग्रेनेड हमले के बाद पीलीभीत भागकर आए तीन कथित खालिस्तानी आतंकियों के एनकाउंटर में उनका नाम प्रमुखता से सामने आया था। पीलीभीत के पूरनपुर क्षेत्र में हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद उनकी काफी चर्चा हुई थी। फिलहाल 'ललिता गौतम हत्याकांड' के विरोध प्रदर्शन के दौरान वायरल हुए वीडियो के बाद वह एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गए हैं और विपक्ष उन पर लगातार सवाल उठा रहा है।
मेरठ में 15 मई, 2026 को BA की छात्रा ललिता गौतम परीक्षा देने के लिए घर से निकली थी लेकिन वह वापस नहीं लौटी। 16 मई को परिजनों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। दो दिन बाद 17 मई को उसका शव रोहटा थाना क्षेत्र के एक गन्ने के खेत में बरामद हुआ था। पुलिस ने CCTV फुटेज खंगाले तो वह अंकुश नाम के युवक के साथ जाती दिखी। पुलिस ने जब अंकुश को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने हत्या का जुर्म कबूल कर लिया। इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। हालांकि मृतका के परिजन और दलित समाज के लोग इस कार्रवाई से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। वे लगातार यह मांग कर रहे हैं कि मुख्य आरोपी के पूरे परिवार और हत्या में शामिल अन्य सभी सह आरोपियों के खिलाफ भी सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
संबंधित विषय:
Updated on:
10 Jul 2026 03:13 pm
Published on:
10 Jul 2026 03:13 pm
