मरीजों को मेडिकल में नहीं मिलती पूरी दवाइयां बाहर से दवाएं खरीदने के लिए डाल रहे दबाव
मेरठ। गर्मी के मौसम में बीमारियों में भी भारी इजाफा होता है। जिसके कारण सरकारी अस्पताल हो या फिर प्राइवेट चिकित्सक, सभी के यहां मरीजों की भारी भीड़ जमा होती है। भीड़ के कारण ही मरीजों का नंबर भी कई घंटों में आ रहा है। मेरठ मेडिकल के हालात और भी बदतर हैं। यहां पर मरीजों की भीड़ तो है ही। साथ ही मरीजों को दवाइयां भी मेडिकल के स्टोर में उपलब्ध नहीं हो पा रही है। जिसके कारण उनको बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। इस तरह योगी सरकार के उन दावों के पोल खुल गर्इ है जिसमें सरकार ये दावा करती आयी है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को अच्छा इलाज आैर सभी दवाएं मिल रही हैं।
मेरठ मेडिकल में अपने को दिखाने आए मेरठ शेरगढ़ी निवासी हरीश चंद्र ने बताया कि वह सुबह दस बजे मेडिकल पहुंचे थे। उनका नंबर साढ़े बारह बजे आया था, लेकिन जो दवाइयां उनको मेडिकल से मिलनी चाहिए थी। वह नहीं मिल पाई है। सस्ती दवाइयां तो यहां पर लिख दी गई और दे दी गई। महंगी दवाइयों के लिए इन लोगों ने कह दिया कि बाहर से जाकर खरीद लो।
उनका कहना था कि हम इसीलिए तो मेडिकल आते हैं कि यहां से डाक्टरों के साथ ही दवाइयों की सुविधा उपलब्ध होती है, लेकिन यहां पर कई घंटों में तो नंबर आता है। इसके बाद जब डाक्टर दवाइयां लिखते हैं तो वह सरकारी स्टोर पर उपलब्ध नहीं होती। हरीश चंद्र ने बताया कि उन्हें ही नहीं, अन्य मरीजों को भी बाहर के प्राइवेट स्टोर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं, जबकि सरकार के साफ आदेश है कि सभी दवाइयां मेडिकल से ही प्रदान की जाए। इसके बारे में जब मेडिकल के दवा स्टोर प्रभारी एडी शुक्ला से बात की गई तो उनका कहना था कि अधिकांश दवाइयां खत्म हुई हैं। उनकी लिस्ट भेजी जा चुकी है। जैसे ही दवाइयों का स्टाक आएगा मरीजाें को देनी शुरू कर दी जाएगी।
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