मेरठ

Sawan Kanwar Yatra 2018 : कांवड़ यात्रा में योगी आैर अखिलेश को लेकर बनाए गए हैं ये गीत, कांवड़िए इन गीतों पर थिरकते हुए बढ़ रहे आगे

Sawan Kanwar Yatra 2018 : कांवड़ यात्रा में लग रहा राजनीति का तड़का, गीत भी इसी हिसाब से तैयार कराए गए

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Aug 02, 2018
कांवड़ यात्रा में योगी आैर अखिलेश को लेकर बनाए गए हैं ये गीत, कांवड़िए इन गीतों पर थिरकते हुए बढ़ रहे आगे

मेरठ। डीजे की धुन के बिना कांवड़ यात्रा अधूरी लगती है। ऐसा हम नहीं कांवड़ लाने वाले भोले के श्रद्धालु कहते हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे बजने पर हमेशा से सवालिया निशान लगते रहे हैं। कभी सरकार की ओर से डीजे पर प्रतिबंध लगा तो कभी प्रशासन ने फिजा खराब होने का हवाला देकर डीजे पर प्रतिबंध लगाया, लेकिन प्रतिबंध के बावजूद कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे की आवाज में कोई कमी नहीं आई। वह निर्बाध गति से और तेज गति से बजती गई। कांवड़ियों के सैलाब को देखते हुए बज रहे डीजे को बंद करवाने की किसी की हिम्मत नहीं हुई। इस बार भी कांवड़ियों द्वारा डीजे पर नई-नई धुन पर थिरकते हुए कांवड़ लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। इस बार कांवड़ में बज रहे गानों पर जरा गौर फरमाये।

कांवड़ यात्रा में चल रहे एेसे-एेसे गीत

डीजे बजवा दिए योगी ने, भोले नचवा दिए योगी ने... अखिलेश ने हुक्म सुनाया था, डीजे पर बैन लगाया था, 2017 के इलेक्शन में, भोले ने इसे हरवाया था.. छक्के छुड़वा दिए योगी ने। इन गीत ने चारों ओर धूम मचाई हुई है। कांवड़ियों का कहना है कि ऐसा कैसे हो सकता है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद भोले के भक्त हैं ऐसे में वे कैसे डीजे पर प्रतिबंध लगा सकते हैं।

वेस्ट यूपी आैर हरियाणवी भाषा में बज रहे गीत

सोशल मीडिया व बाजार में कांवड़ गीतों की बहार आ गई है। कांवड़ यात्रा के दौरान वैसे तो सर्वाधिक हरियाणवी और पश्चिम उप्र के गीताें की अधिक मांग रहती है, लेकिन हाल ही में आए गीत डीजे बजवा दिए योगी ने, इन दिनों कांवड़ियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसमें सूबे के मुख्यमंत्री योगी का गुणगान करने के साथ समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर हमला है। कुछ ऐसे भी गीत चल रहे हैं जिनमें योगी के प्रधानमंत्री बनने की बात कही जा रही है। जिसमें योगी ने नहीं रोका डीजे बजाने से, प्रधानमंत्री बना देगा भोले योगी का 2019 के चुनाव में। भोलों के बीच कांवड़ गीत बहुत लोकप्रिय हो रहे हैं। हरियाणवी और पश्चिम उप्र की भाषा में तैयार किए गए अलबमों की सबसे ज्यादा मांग है। फिल्मी गाने व स्थानीय ग्रामीण भाषा में बने कांवड़ गीत भी शिवभक्तों को लुभा रहे हैं।

Updated on:
03 Aug 2018 05:36 pm
Published on:
02 Aug 2018 07:00 pm
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