UP Nikay Chunav: मेरठ नगर निगम को लेकर कहा जाता है कि प्रदेश में जिसकी सरकार होती है। उस पार्टी का मेयर यहां पर नहीं बनता है। ऐसे में क्या सीएम योगी इस मिथक को तोड़ पाएंगी या बरकरार रहेगा।
UP Nikay Chunav 2023: मेरठ में नगर निकाय चुनाव को लेकर तैयारियां तेज है। सभी राजनीतिक दल यहां पर अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिए पूरा दमखम लगा रहे हैं। वहीं मेरठ को लेकर एक मिथक भी है। कहा जाता है कि जो पार्टी सत्ता में होती है, उस पार्टी के मेयर यहां पर नहीं बनते हैं। साल 1995 से लेकर 2017 तक चला आ रहा है। ऐसे में सीएम योगी के पास यह चुनौती है कि वह इस मिथक को तोड़ पाएंगे कि नहीं।
मेरठ नगर निगम सीट को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। साल 2017 जब यूपी में बीजेपी की सरकार बनी और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने। उसके बाद निगम के चुनाव हुए लेकिन यह मिथक नहीं टूटा। तब बसपा की सुनीता वर्मा ने सत्ताधारी पार्टी बीजेपी की कांता कर्दम को हराकर मेयर बनी।
एक बार भी सामान्य वर्ग का नहीं बना है मेयर
1995 से लेकर 2017 तक मेरठ में नगर निगम के पांच बार चुनाव हुए हैं। इसमें दो बार बीजेपी और तीन बार बसपा के मेयर बने हैं। 30 साल के लंबे कार्यकाल में अभी तक निगम में एक बार भी सामान्य वर्ग का मेयर नहीं बना। चार बार पिछड़ा वर्ग और एक बार अनुसूचित जाति के व्यक्ति ने महापौर की कुर्सी संभाली।
निगम पर कब- किस पार्टी का रहा कब्जा?
1. 1994 में मेरठ को नगर निगम का दर्जा मिला। 1995 में पहली बार मेयर के लिए चुनाव हुआ। बसपा प्रत्याशी अयूब अंसारी पहले मेयर बने। उस समय प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी।
2. साल 2000 में नगर पालिका का सीमा विस्तार हुआ और 70 वार्ड हो गए। इस बार मेरठ की जनता ने बसपा के हाजी शाहिद अखलाक को जिताकर मेयर बनाया। उस समय यूपी में भाजपा की सरकार थी और राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री थे।
3. साल 2006 प्रदेश में सपा की सरकार थी और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री। लेकिन मेरठ की जनता ने भाजपा प्रत्याशी मधु गुर्जर को मेयर बनाया।
4. साल 2012 के निकाय चुनाव में यूपी में सपा की सरकार थी। अखिलेश यादव सीएम थे तब भाजपा के हरिकांत अहलूवालिया मेयर बने।
5. 2017 के निकाय चुनाव में जब यूपी में भाजपा की सरकार थी। योगी आदित्यनाथ पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। उस समय निकाय चुनाव में बसपा की सुनीता वर्मा मेयर बनी। हालांकि बाद में सुनीता वर्मा ने सपा ज्वाइन कर ली।
बीजेपी इस मिथक को तोड़ पाएंगी
बीजेपी ने हरिकांत अहलूवालिया को अपना मेयर उम्मीदवार बनाया है। सपा ने विधायक अतुल प्रधान की पत्नी सीमा प्रधान को प्रत्याशी बनाया है। बसपा ने यहां से मुस्लिम कार्ड खेला है। बसपा ने मेरठ मेयर सीट के लिए हसमत मलिक को प्रत्याशी बनाया है, जबकि कांग्रेस ने नसीम कुरैशी पर दांव चला है। सभी प्रत्याशी अपनी अपनी जीत का दावा करते हुए एक दूसरे पर जुबानी हमले कर रहे हैं। निगाहें पर वोटरों पर हैं कि भाजपा इस मिथक को कैसे तोड़ेगी।