Today Meerut Weather Update आज फिर सुबह की शुरूआत हल्की बारिश के साथ हुई है। मेरठ और आसपास के जिलों में हल्की बारिश और आसमान में बादल से दिन में ऐसे ही मौसम रहने की उम्मीद जताई जा रही है। मौसम विभाग ने आज और कल बारिश की संभावना जताई है। इस बारिश से किसानों के चेहरे खिले हुए हैं। बता दें कि इस बार मानसूनी सीजन में मेरठ और पश्चिमी उप्र में औसत से भी कम बारिश होने से इसका असर खरीफ की सीजन पर पड़ा है।
Today Meerut Weather Update कन्या नक्षत्र में मानसून पश्चिमी उप्र और एनसीआर के ऊपर मेहरबान हो गया है। यहीं कारण है कि अब झमाझम बारिश हो रही है। पिछले 4 दिन में एनसीआर और पश्चिमी उप्र के लोग बारिश से सराबोर हो रहे हैं। इस बारिश से जहां पश्चिमी उप्र के किसानों को राहत मिली है। इस बार मानसूनी सीजन में बारिश कम होने से किसानों को फसल की सिचाईं के लिए टयूबवैल का सहारा लेना पड़ रहा था। मानसूनी सीजन में बारिश नहीं होने से इस साल धान की रोपाई पर भी इसका असर पड़ है। पुरवा नक्षत्र में एक बूंद पानी नहीं बरसने से मात्र 40 फीसद खेतों में धान की रोपाई हो पाई है। इसके बाद बारिश और सिंचाई के अभाव में फसलें सूख रही थी। बारिश नहीं होने से खेतों की मिटटी में भी दरार पड़ने लगी थी। किसानों ने बोरिंग से सिंचाई करके फसल को जीवित रखा।
अब कन्या नक्षत्र प्रवेश करते ही आसमान से झमाझम बारिश हो रही है। आज बुधवार केा भी सुबह झमाझम बारिश से मेरठ और पश्चिमी उप्र के लोग सराबोर हुए। पूरे पश्चिमी उप्र में आज जोरदार बारिश हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक आज दिन में भी बारिश के आसार हैं। इससे पहले सोमवार और मंगलवार को भी दिन में हल्की बारिश हुई थी। जिसके बाद तापमान में कमी आई थी। पिछले चार दिन से लगातार बारिश के हालात बने हुए हैं। मेरठ में अभी ताकि 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश हो चुकी है। इस बारिश के चलते जहां तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। वहीं बारिश से एक्यूआई यानी वायु गुणवत्ता में भी काफी सुधार आया है। मेरठ और आसपास के जिलों में हवा की रफ्तार 15 किलोमीटर प्रतिघंटा है।
मौसम विभाग ने अभी दो दिन और बारिश की संभावना व्यक्त की है। उसके बाद मौसम साफ होगा। बारिश के चलते वातावरण में उमस का स्तर काफी कम हुआ है। इसके कारण लोगों को गर्मी से भी राहत मिली है। वहीं वर्षा के कारण किसानों को भी फायदा हुआ है। बता दें कि इस बार मानसूनी सीजन में बारिश के नहीं होने से मेरठ और आसपास के जिलों के लोगों केा गर्मी का सामना करना पड़ रहा था। इससे किसानों की खड़ी फसल भी बर्बादी के कगार पर थी। तापमान बढ़ने से खेतों की नमी के साथ पानी उपलब्ध नहीं होने से पौधों की ग्रोथ भी रूक गई थी।