
नई दिल्ली। भारत के मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर वोडाफोन आइडिया में हिस्सेदारी के लिए अमरीकी वायरलेस कैरियर वेरिजॉन और अमेजॉन 4 बिलियन अमरीकी डॉलर (करीब 29,354 करोड़ रुपये) से अधिक का निवेश कर सकते हैं। काफी संघर्षों में जुटी भारतीय दूरसंचार कंपनी के शेयरों में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
अंग्रेजी अखबार मिंट की गुरुवार की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की सुप्रीम कोर्ट द्वारा फैसला सुनाए जाने के कुछ दिनों बाद यह खबर आई है कि मोबाइल कैरियर को 10 साल के भीतर सरकारी बकाया रकम का निपटारा करना चाहिए। अदालत ने वोडाफोन आइडिया को इस मामले में दंड से कुछ राहत दे दी क्योंकि कहा गया था कि यह एक चिंता का विषय है।
ब्रिटेन के वोडाफोन और भारत के आइडिया के बीच एक संयुक्त उद्यम वोडाफोन आइडिया पर अभी भारत सरकार के करीब 50,000 करोड़ रुपये बकाया हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक वोडाफोन आइडिया की हिस्सेदारी की बिक्री की वार्ता को अदालत के फैसले के चलते रोके रखा गया था, लेकिन अमेजॉन और वेरिजॉन अब उन्हें फिर से शुरू करने के लिए तैयार हैं। अमेजॉन और वेरिजॉन ने नियमित अमरीकी कार्यकारी वक्त के बाद किसी भी तरह का बयान देने से इनकार कर दिया।
मंगलवार को आए फैसले से ग्राहकों की संख्या के लिहाज से भारत की तीसरी सबसे बड़ी टेलिकॉम फर्म वोडाफोन आइडिया को कुछ राहत तो मिली है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि घाटे में चल रही कंपनी पर वित्तीय दबाव बना रहेगा।
ऐसे हालात में निवेश के लिए किए जा रहे प्रयासों की खबरों के बाद से वोडाफोन आइडिया के शेयरों में एक साल के भीतर सबसे तेजी नजर आई और 26.77 प्रतिशत ऊपर की कीमत पर बंद हुए। अब वोडाफोन आइडिया शुक्रवार को होने वाली बोर्ड मीटिंग में अपने ऑप्टिक फाइबर कारोबार की बिक्री के बारे में समीक्षा कर सकती हैं।
बताया जा रहा है कि कनाडा के ब्रुकफील्ड एसेट मैनेजमेंट और प्राइवेट इक्विटी ग्रुप केकेआर इस बिजनेस के लिए दावेदार थे। वहीं, एक अन्य समाचार चैनल ने बताया कि वोडाफोन आइडिया लगभग 1.5 बिलियन डॉलर (करीब 11,030 करोड़ रुपये) जुटाने की योजना बना रही थीं और इसके लिए सलाहकारों के साथ काम कर रही थीं।
वहीं, इस मामले पर वोडाफोन आइडिया और केकेआर ने किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जबकि ब्रुकफील्ड के एक प्रतिनिधि ने टिप्पणी के लिए किए गए अनुरोध का तुरंत जवाब नहीं दिया।