जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी ने भी कहा है कि गवर्नर रूल में काम करना आसान होगा, हम ऑपरेशन तेज करेंगे।
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में भाजपा-पीडीपी का गठबंधन टूट जाने के बाद महबूबा मुफ्ती की सरकार गिर गई है और बुधवार को सुबह से ही राज्य में राज्यपाल शासन लागू हो गया है। कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू हो जाने के बाद बहुत सी चीजें बदल गई हैं, खासकर कि घाटी में सेना को खुली छूट मिल गई है। आपको बता दें कि भाजपा ने समर्थन ही इस आरोप के साथ लिया है कि घाटी के हालातों को सुधारने में महबूबा सरकार लगातार फेल हो रही थी, लेकिन अब राज्यपाल शासन लगने की वजह से पूरा कंट्रोल गवर्नर के जरिए केंद्र सरकार के हाथ में रहेगा और ऐसे में सेना को खुली छूट रहेगी घाटी में मोर्चा खोलने की। आपको बता दें कि इससे पहले कश्मीर में पहले ही केंद्र सरकार ने सीजफायर खत्म कर ऑपरेशन ऑलआउट शुरू कर दिया था।
सेना और पुलिस के लिए आतंक को खत्म करना हुआ आसान
एक अंग्रेजी अखबार की खबर के मुताबिक, अभी तक जम्मू-कश्मीर पुलिस पर स्थानीय नेताओं के दबाव में अलगाववादियों के प्रति नरम रवैया अपनाने का दबाव था, लेकिन अब पुलिस भी पूरी आजादी के साथ काम कर सकेगी। इस बात को खुद जम्मू-कश्मीर के डीजीपी एसपी वैद ने माना भी है। उन्होंने कहा है कि आने वाले दिनों में आतंकियों के खिलाफ होने वाले ऑपरेशन में तेजी आएगी और हम आतंकियों को छोड़ने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा है कि हमारे ऑपरेशन जारी रहेंगे। रमजान के दौरान ऑपरेशंस पर रोक लगाई गई थी। ऑपरेशन पहले भी चल रहे थे, अब इन्हें और तेज किया जाएगा। राज्यपाल शासन में अब काम करना आसान हो जाएगा।
CASO और SADO को घाटी में फिर किया गया लागू
इसके अलावा सेना को भी ये उम्मीद है कि अभी तक राज्य पुलिस पर राज्य सरकार का ही शासन था, लेकिन अब पुलिस भी आतंक विरोधी ऑपरेशन में सेना का साथ देगी। एक अधिकारी ने बताया कि गवर्नर रूल लागू होने के साथ ही जम्मू-कश्मीर पुलिस बिना किसी राजनीतिक प्रभाव के बेहतर स्थिति में होगी। पुलिस का खुफिया तंत्र बेहतर ढंग से काम करेगा और प्राप्त जानकारियों को सुरक्षा बलों के साथ शेयर किया जा सकेगा। अधिकारी ने बताया, 'रियल टाइम इन्फॉर्मेशन मिलने से आतंक के खिलाफ तेजी से कार्रवाई की जा सकती है।' सेना ने अपने अति सक्रिय CASO (कार्डन ऐंड सर्च) और SADO (सीक ऐंड डेस्ट्रॉय) ऑपरेशन को जम्मू कश्मीर में फिर से लागू कर दिया है।
अंग्रेजी अखबार की खबर के मुताबिक, एक अधिकारी ने बताया, 'कुछ राजनेताओं की तरफ से पत्थरबाजों, अलगाववादियों और कट्टरपंथियों को समर्थन मिलता है। कोई राजनीतिक दबाव न होने से सुरक्षा बल ज्यादा अक्रामकता से काम करेंगे।'