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Water crisis: 24 करोड़ का प्रोजेक्ट पूरा, फिर भी पानी के लिए जूझ रहे हैं नवाडीह के 500 लोग, ढोढ़ी और नाले के पानी से बुझती है प्यास

Water crisis: एमसीबी जिले के ग्राम पंचायत सरभोका का मामला, ग्रामीण बोले- ढोढ़ी सूखने के बाद नाले के पानी का सहारा, आलम यह है कि 2-3 दिन में एक बार नहाने का मिलता है मौका

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Water crisis

Children reached to took water near dhodhi (Photo- Patrika)

बैकुंठपुर. एमसीबी जिले में 24 करोड़ की लागत से समूह जल प्रदाय योजना के तहत काम पूरा हो चुका है। इसके बाद भी ग्राम पंचायत सरभोका के आश्रित ग्राम नवाडीह की 500 आबादी भीषण गर्मी में प्यासी (Water crisis) है। हर दिन इस गांव के बूढ़े से लेकर बच्चे डिब्बा, बाल्टी से पेयजल को लेकर जद्दोजहद करने को मजबूर हैं। ग्रामीण ढोढ़ी और नाले का गंदा पानी पीने को विवश हैं। आलम यह है कि बच्चों को 2-3 दिन में एक बार ही नहाने का मौका मिलता है।

जल जीवन मिशन के तहत वर्ष 2023में लाई समूह जल प्रदाय योजना के लिए 24.19 करोड़ की मंजूरी मिली थी। पीएचई विभाग ने टेंडर प्रक्रिया पूरी कर अक्टूबर 2023 को मेसर्स रुद्र कंस्ट्रक्शन अंबिकापुर को निर्माण कराने जिम्मेदारी सौंपी है। इस दौरान करीब ढाई साल में 20 गांव में 23 ओवरहेड टंकी (Water crisis) सहित हसदेव नदी में इंटेकवेल और फिल्टर प्लांट का निर्माण कराया गया है।

लेकिन कई ओवरहेड टंकी और पाइपलाइन में खामियां है। फिलहाल ट्रायल अवधि में इंटेकवेल से पानी सप्लाई करने पर जगह-जगह पाइपलाइन फूट जाती है। इससे भीषण गर्मी भी 20 गांव की आबादी प्यासी (Water crisis) है। योजना में ग्राम पंचायत सरभोका भी शामिल है। लेकिन आश्रित ग्राम नवाडीह की 500 आबादी पेयजल को लेकर जद्दोजहद कर रही है।

गांव के लोग आज भी ढोढ़ी के दूषित पानी पर निर्भर हैं। हालत यह है कि ढोढ़ी का गंदा पानी भी एक-दो सप्ताह में सूख जाता है। इससे ग्रामीणों को विवश होकर नाले का भी प्रदूषित पानी (Water crisis) लाना पड़ता है। बताया जा रहा है कि पानी की कमी इतनी गंभीर है कि बच्चों को दो-तीन दिन में एक बार ही नहाने का मौका मिलता है।

3 किमी पगडंडी से चलने की मजबूरी

ग्रामीणों (Water crisis) का कहना है कि स्कूलपारा से नवाडीह तक करीब 3 किलोमीटर का कच्चा, उबड़-खाबड़ और पगडंडीनुमा रास्ता ही एकमात्र संपर्क मार्ग है। इससे रोजमर्रा का आवागमन खतरे से भरा रहता है। स्थिति इतनी भयावह है कि बीमार पडऩे पर मरीजों को खाट पर उठाकर इस रास्ते से स्कूलपारा तक ले जाना पड़ता है। ऐसे में कई बार किसी के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

Water crisis: महिलाओं का ये है कहना

स्थानीय महिला सुंदरी बाई का कहना है कि पीने के पानी (Water crisis) तक के लिए जूझना पड़ता है और आगे हालात और बिगडऩे वाले हैं। कई दिन लोग बिना नहाए ही रह जाते हैं। संगीता का कहना है कि पानी की समस्या गर्मी बढ़ते ही समस्या विकराल रूप ले लेती है। हमारे के लिए गंदे नाले का पानी ही सहारा रह जाता है।

वहीं रेखा का कहना है कि पानी खत्म होते ही पूरा गांव बदहाली में जीने को मजबूर हो जाता है। वहीं स्कूलपारा से नवाडीह तक करीब 3 किलोमीटर उबड़-खाबड़ और पगडंडीनुमा रास्ता ही है।

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