Ayodhya Dispute: आज राम मंदिर मुद्दे पर सुनवाई का तीसरा दिन रामलला विराजमान के वकील रख रहे हैं अपना पक्ष शीर्ष अदालत ने निर्मोही अखाड़े को दस्‍तावेज पेश करने को कहा
नई दिल्ली। अयोध्या विवाद पर तीसरे दिन की सुनवाई गुरुवार को प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में जारी है। न्यायमूर्ति अशोक भूषण ने सुनवाई के दौरान रामलला के वकील से पूछा कि क्या जन्मस्थान को व्यक्ति माना जा सकता है?
न्यायमूर्ति अशोक भूषण ने कहा कि जिस तरह उत्तराखंड की हाईकोर्ट ने गंगा को व्यक्ति माना था। इस पर परासरण ने कहा कि हां, राम जन्मभूमि व्यक्ति हो सकता है और रामलला भी। वो एक मूर्ति नहीं, बल्कि एक देवता हैं। हम उन्हें सजीव मानते हैं।
फिलहाल शीर्ष अदालत ने रामलला विराजमान के वकील से पूछा है कि क्या दिसंबर, 1949 में जो मूर्तियां रखी गई थीं, उन मूर्तियों की कार्बन डेटिंग पद्दति से जांच कराई गई?
शीर्ष अदालत के कड़वे सवाल
सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने रामलला के वकील से पूछा है कि जिस तरह से रामलला विराजमान का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आया है। क्या इस तरह का मामला दुनिया में कभी आया है, जब भगवान राम या जीसस ने अदालत का दरवाजा खटखटाया हो? परासरण ने कहा इस बारे में जानकारी नहीं है। इस बात का पता करना पड़ेगा।
परासरण ने कहा ऐसे उदाहरण पौराणिक ग्रंथों में कई जगह मिलते हैं जिनमे ये साक्ष्य पुष्ट होता है कि यही वो स्थान है जहां राम ने जन्म लिया।
ब्रिटिश राज में भी ईस्ट इंडिया कंपनी ने जब इस स्थान का बंटवारा किया तो मस्जिद की जगह को राम जन्म स्थान का मंदिर माना।
रामलला विराजमान हिंदुओं के लिए पूज्य स्थल
रामलला विराजमान के वकील परासरण ने कहा कि श्रीराम का जन्म होने के कारण ही हिंदुओं के लिए ये जगह ज्यादा पूज्य है। वाल्मीकि रामायण का उदहारण देते हुए कहा कि स्वयं विष्णु ने देवताओं से कहा कि वह अयोध्या में दशरथ राजा के यहां मानव रूप में जन्म लेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने रामलला की तरफ से पेश 92 साल के परासरण से कहा- आप चाहें तो बैठकर अपनी दलील रख सकते हैं। परासरण ने विनम्रता से कहा- परंपरा इसकी इजाजत नहीं देती। मैं खड़े होकर ही अपनी बात रखूंगा।
निर्मोही अखाड़े से दस्तावेज पेश करने को कहा
इससे पहले मंगलवार और बुधवार को निर्मोही अखाड़ा ने अपना पक्ष रखते हुए विवादित जमीन पर अपना दावा पेश किया था।
सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ के सामने सबसे पहले पक्ष रखते हुए निर्मोही अखाड़े ने कहा कि विवादित जमीन पर मुस्लिम पक्ष का दावा नहीं बनता।
जस्टिस चंद्रचूड़ ने निर्मोही आखड़े के वकील से कहा कि अपनी देवदारी को लेकर तमाम दस्तावेज लेकर आइए और उसका एक चार्ट बनाएं। उसके बाद हम आपको सुनेंगे। अब निर्मोही अखाड़े की दावेदारी से संबंधित दस्तावेज शीर्ष अदालत को देना है।