केरल में हुई खून की बारिश को लेकर आज भी तरह-तरह के रिसर्च किए जा रहे हैं, लेकिन यह वैज्ञानिकों के लिए आज भी बड़ा सिरदर्द बना हुआ है।
नई दिल्ली। खबर की हैडलाइन को मज़ाक में लेने की कतई भी भूल मत करना। क्योंकि इस खबर की सच्चाई जानकर आपके पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक जाएगी। देश के एक अंग्रेज़ी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2013 में केरल के आसमान से अनोखी बारिश हुई थी। अनोखी इसलिए क्योंकि 5 साल पहले हुई बारिश का रंग लाल था। लाल रंग की बारिश के बाद लोग तो हैरान थे ही लेकिन वैज्ञानिकों के गले से भी ये सच्चाई नीचे नहीं उतर रही थी। शुरुआत में तो वैज्ञानिकों ने माना कि लाल रंग की बारिश के पीछे प्रदूषण एक बड़ी वजह हो सकता है।
लेकिन सच तो ये है कि घटना के 5 साल बाद भी वैज्ञानिक केरल में हुई खून की बारिश की असली सच्चाई का पता नहीं लगा पाए हैं। केरल में हुई खून की बारिश को लेकर आज भी तरह-तरह के रिसर्च किए जा रहे हैं, लेकिन यह वैज्ञानिकों के लिए आज भी बड़ा सिरदर्द बना हुआ है। केरल के बादलों से बरसे सुर्ख लाल रंग की बारिश को लेकर कई तरह की बातें भी बनाई गई। कुछ लोग इस बात का दावा कर रहे थे कि लाल रंग की बारिश में खून है, लेकिन पानी की जांच के बाद वैज्ञानिकों को उसमें कुछ भी असाधारण नहीं मिला।
लेकिन इसके बाद जो कुछ भी हुआ, उसने सभी की रातों की नींद उड़ा दी। दोबारा जांच करने पर जो नतीजे आए, उस पर विश्वास करना काफी मुश्किल था। पानी के सैंपल में वैज्ञानिकों को डीएनए के 6 सैंपल मिले। बस फिर क्या था, केरल के बादलों से बरसे खूनी बारिश को लेकर देश-विदेश के बड़े-बड़े वैज्ञानिकों के बीच बहस शुरु हो गई। कुछ वैज्ञानिकों ने खूनी बारिश का संबंध एलियंस से जोड़ना शुरु कर दिया। बताते चलें कि अभी तक वैज्ञानिकों के पास खूनी बारिश को लेकर कोई पुख्ता जवाब नहीं है।