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CJI की बड़ी टिप्पणी : किसानों के विरोध के अधिकार में हस्तक्षेप नहीं करेंगे, पर आंदोलन से किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए

    किसान आंदोलन को रोकने को कोई सवाल नहीं उठता। कानून का विरोध करना किसानों का मौलिक अधिकार।  

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हमें केवल यह देखना है कि आंदोलन के तरीके से किसी के जीवनको कोई नुकसान न हो।

नई दिल्ली। दिल्ली की सड़कों पर जारी किसान आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने कहा कि कृषि संबंधी तीनों कानून मायने रखता है। हम कानूनों के खिलाफ विरोध करने के मौलिक अधिकार को मान्यता देते हैं। इसे रोकने के लिए कोई सवाल नहीं है। केवल एक चीज जिस पर हम गौर कर सकते हैं वह यह है कि इससे किसी के जीवन को नुकसान नहीं होना चाहिए।

सीजेआई ने कहा कि किसानों को विरोध करने का अधिकार है। हम इसमें हस्तक्षेप नहीं करेंगे लेकिन विरोध का तरीका कुछ ऐसा है जिस पर हम गौर करेंगे। हम केंद्र से पूछेंगे कि विरोध का तरीका क्या है? अगर यह तरीका नागरिकों के आंदोलन के अधिकार को प्रभावित करता है तो इसमें थोड़ा बदलाव कर सकते हैं।

बता दें कि पिछले 22 दिनों से किसान आंदोलन जारी है। किसान संघों के नेता कृषि संबंधी कानूनों को वापस लेने की जिद पर भी अड़े हैं। हालांकि, अब किसान नेता सरकार के साथ फिर से बातचीत करने के लिए तैयार हैं। सरकार की ओर से भी कहा गया है कि हम हर पल बातचीत के लिए तैयार हैं।

Updated on:
17 Dec 2020 01:30 pm
Published on:
17 Dec 2020 01:22 pm
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