
नई दिल्ली। राष्ट्रपति महात्मा गांधी को भारत रत्न (Bharat Ratna) दिए जाने के संबंध में देश की सर्वोच्च अदालत में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस संबंध में केंद्र सरकार को कोई भी आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान यह टिप्पणी भी की कि महात्मा गांधी भारत रत्न से कहीं ऊपर हैं।
इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दायर करने वाले व्यक्ति से कहा कि अदालत उनकी भावनाओं की कद्र करती है, लेकिन महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) किसी भारत रत्न से कहीं ज्यादा बड़े हैं। पूरी दुनिया में महात्मा गांधी का बहुत सम्मान किया जाता है। अगर याचिकाकर्ता चाहे तो वह खुद इस संबंध में सरकार को ज्ञापन सौंप सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर करने वाले व्यक्ति ने कहा था कि भारत सरकार अब तक तमाम लोगों को भारत रत्न से सम्मानित कर चुकी है। हालांकि राष्ट्रपिता कहे जाने वाले महात्मा गांधी को अभी तक भारत रत्न से सम्मानित नहीं किया गया है। राष्ट्रपति भी इस सम्मान के हकदार हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के दावों को देखने के बाद कहा कि अदालत इस मामले पर सुनवाई नहीं कर सकती। यदि याचिकाकर्ता चाहे तो केंद्र सरकार को इस संबंध में ज्ञापन सौंप सकता है। अदालत की नजर में तो महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) भारत रत्न से कहीं ऊपर हैं।
भारत रत्न
हमारे देश में सर्वोच्च नागरिक सम्मान स्वरूप भारत रत्न दिया जाता है। भारत सरकार यह सम्मान उन्हें दिया जाता है जिन्होंने असाधारण देश सेवा की होती है। इनमें साहित्य, विज्ञान, कला, सार्वजनिक सेवा और खेल भी शामिल होते हैं। 2 जनवरी 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने भारत रत्न की शुरुआत की थी।