दुनिया भर में कोरोना की ‘जादुई दवा’ के तौर पर देखा जा रहा था। आईसीएमआर ने कहा इसे दूसरी जगहों पर अपनाया नहीं जा सकता। अमरीका तक से संपर्क कर इस इलाज के बारे में जानकारी ली गई।
मुकेश केजरीवाल, नई दिल्ली। देश और दुनिया भर में भले ही कोरोना के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही हो, लेकिन इनके इलाज के लिए जयपुर के सरकारी अस्पताल की ओर से अपनाए गए तरीके को अभी प्रमाणिक नहीं पाया गया है। इसकी बजाय इसे अभी हिट एंड ट्रायल की श्रेणी में रखा गया है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) का भी कहना है कि अभी दूसरी जगहों पर इसे अपनाने के लिए नहीं कहा जा सकता।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन ने ‘पत्रिका’ से बातचीत में जयपुर के सवाय मान सिंह अस्पताल में अपनाए गए इलाज के तरीके को ले कर कहा, “एंटी एचआईवी दवा देना या पैरासिटामोल का प्रयोग करना एक हिट एंड ट्रायल जैसा प्रयास है। कुछ मामलों में इन दवाओं के इस्तेमाल से रोगियों को कुछ फायदा हुआ है लेकिन इसे प्रामाणिक नहीं माना जा सकता।”
इस अस्पताल में एंटी-एचआइवी दवा दे कर तीन मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज किया गया था, जिनमें दो मरीज 70 और 85 साल के मरीज थे। इसके बाद भारत के विभिन्न राज्यों के साथ ही अमरीका तक से इस संबंध में राज्य के स्वास्थ्य मंत्रालय से अनुभव साझा करने को कहा जा रहा था।
आईसीएमआर के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक कहते हैं, “जब ये मरीज वहां पहुंचे थे तो निश्चित तौर पर इन दवाओं को आजमाने की मंजूरी दी गई थी। इसी तरह प्रयोग के तौर पर स्वाइन फ्लू की दवा भी उपयोग में लाई जा रही है। लेकिन अभी इस संबंध में किसी भी नतीजे पर पहुंचने के लिए काफी अध्ययन और व्यवस्थित ट्रायल की जरूरत है।” ये बताते हैं कि दुनिया भर के दूसरे देशों के साथ भी इस संबंध में विचार किया जा रहा है।