
नई दिल्ली। दिल्ली बॉर्डर पर कृषि कानून के खिलाफ किसानों के आंदोलन का आज भी जारी है। आंदोलनकारी किसानों को सडक से हटाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। बुधवार को हुई सुनवाई में शीर्ष अदालत ने कहा था कि वह कोई भी आदेश देने से पहले आंदोलनकारी संगठनों को सुनेगा। इस बीच किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि हम इस मुद्दे पर कमेटी में शामिल होने के बजाय सरकार के बैठकर कर बात करेंगे।
8 किसान संघों को पार्टी बनाया
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आठ किसान संघों को पार्टी बनाया है। इनमें भारतीय किसान यूनियन टिकैत, बीकेयू सिधुपुर, बीकेयू राजेवाल, बीकेयू लाखोवाल, जम्हूरी किसान सभा, बीकेयू दकौंडा, बीकेयू दोआबा, कुल हिंद किसान फेडरेशन हैकोर्ट ने विवाद के हल के लिए एक कमेटी बनाने की भी बात कही है। इस कमेटी में आंदोलनकारी संगठनों के साथ सरकार और देश के बाकी किसान संगठनों के भी लोग होंगे।
आंदोलन पंजाब तक सीमित
केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि दिल्ली के बॉर्डर पर जारी आंदोलन सिर्फ एक राज्य तक सीमित है और पंजाब के किसानों को विपक्ष गुमराह कर रहा है। जबकि स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने ट्विटर पर कहा है कि उच्चतम न्यायालय तीनों कृषि कानूनों की संवैधानिकता तय कर सकता है और उसे ऐसा करना चाहिए। लेकिन इन कानूनों की व्यावहारिकता न्यायपालिका तय नहीं कर सकती।