विविध भारत

संस्कृत को आमजन तक पहुंचाएगा आईआईटी कानपुर

आईआईटी कानपुर समेत देश के कई संस्थानों ने संस्कृत को आम जन तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है।

2 min read
iit kanpur

कानपुर। आईआईटी कानपुर समेत देश के कई संस्थानों ने संस्कृत को आम जन तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। इसके लिए देश की कई तकनीकी और शिक्षण संस्थाओं ने हाथ मिलाया है। बुधवार को राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ की ओर से आयोजित ‘डिजिटाइज्ड संस्कृत कॉप्र्स’ नामक विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में इन संस्थाओं ने संस्कृत भाषा को आमजन तक पहुंचाने पर सहमति जताई है। इस परियोजना का उद्देश्य संस्कृत भाषा का पुनरोत्थान करना है। कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि तकनीक की मदद से ऑपरेटिंग सिस्टम को उन्नत बनाना, ताकि संस्कृत में भी इंटरनेट पर सामग्री खोजी जा सके और उपलब्ध कराई जा सके।

इन संस्थानों ने दी रजामंदी
आईआईटी कानपुर, रिप्रजेंटेटिव्स ऑफ राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान (नई दिल्ली), वैदिक संशोधन मंडल (पुणे), कर्नाटक संस्कृत यूनिवर्सिटी(बेंगलूरु), कालिदास संस्कृत यूनिवर्सिटी(नागपुर) संस्कृत भारती(बेंगलूरु), चिन्मय संस्कृत विश्व विद्यापीठ(एर्णाकुलम), लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ(नई दिल्ली), संस्कृत संवर्धन परिषद(नई दिल्ली) और संस्कृत अकादमी(मेलकोट)

बाधाओं को दूर करना मकसद
कार्यशाला में सभी संस्थानों ने संस्कृत में इंटरनेट पर सामग्री मुहैया कराने पर जोर दिया। इसके अलावा, सामग्री के डिजिटलीकरण की राह में आने वाली बाधाओं को दूर करना भी है। राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ के वीसी प्रोफेसर मुरलीधर शर्मा ने तिरुपति में बताया कि सभी संस्थान इस बारे में सहमति पत्र पर दस्तखत भी करेंगे। नई सामग्री की पहचान करेंगे और दूसरी भाषाओं से सामग्री के अनुवाद में आने वाली अड़चनों को भी दूर करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि संस्थान प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए समय-समय पर सुझाव भी देंगे।

बीते साल संस्कृत की पढ़ाई को मिली थी हरी झंडी
बीते साल अक्टूबर में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने उस प्रस्ताव को हरी झंडी दी थी, जिसके तहत कानपुर आईआईटी में पहली बार छात्र संस्‍कृत की पढ़ाई करेंगे। संस्थान में संस्कृत की पढ़ाई और रिसर्च के बारे में प्रस्ताव दिया गया था। अभी तक आईआईटी में फ्रेंच, जर्मन और जापानी भाषाएं सिखाई जा रही थीं। एक बैठक में संस्‍कृत को मानविकी विभाग में बतौर कोर्स शामिल करने की बात कही गई। इसमें छात्रों को वैदिक विज्ञान के साथ भारतीय संस्‍कृति से जुड़ी जान‍कारियां भी दी जाएंगी। इन सभी विषयों पर छात्र रिसर्च भी कर सकेंगे।

ये भी पढ़ें

छेड़छाड़ से आहत छात्रा ने खोली जुबान, हरकत में आया आईआईटी प्रशासन

ये भी पढ़ें

IIT Kanpur में रैगिंग मामले में 22 छात्र निलंबित

Published on:
28 Sept 2017 08:53 pm
Also Read
View All