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क्या उत्तर कोरिया के तानाशाह को गुमराह कर रहा चीन, ट्रंप-किम की वार्ता में बन रहा है रोड़ा

उत्तर कोरिया के तानाशाह ने हाल ही में चीन के राष्ट्रपति शी जिंनपिंग से मुलाकात की थी, यहां से लौटकर किम ने वार्ता तोड़ने की धमकी दी है।
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क्या उत्तर कोरिया के तानाशाह के मन में संदेह जगा रहा चीन, ट्रंप—किम की वार्ता में बन रहा है रोड़ा

नई दिल्ली। उत्तर कोरिया और अमरीका में बातचीत अभी भी संभावित है। कभी अमरीकी राष्ट्रपति वार्ता को राजी होते हैं और उत्तर कोरियाई शासक किम इससे इनकार करते हैं तो कभी किम वार्ता के लिए तैयार होते हैं और ट्रंप इससे इनकार करते हैं। हालांकि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ट्वीट करके उत्तर कोरिया से वार्ता की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा है कि 12 जून को न सही वह किसी अन्य तारीख पर भी बातचीत कर सकते हैं। इन घटनाओं के बीच चीन अहम भूमिका निभा रहा है। वह एक तरफ परमाणु निरस्त्रीकरण की बात अमरीका से करता है तो दूसरी तरफ उत्तर कोरिया को दक्षिण कोरिया के खिलाफ भड़काने की कोशिश कर रहा है। इससे वह इस वार्ता पर ग्रहण लगाने की तैयारी कर रहा है।

रणनीति बनाने के लिए चीन गए थे किम

हाल ही में उत्तर कोरिया का शासक किम जोंग चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करने पहुंचा था। विशेषज्ञों की माने तो वह अमरीका से वार्ता को लेकर अपनी रणनीति तय करने के लिए गया था। चीन से लौटने के बाद ही किम के तेवर बदले दिखाई दिए। उन्होंने वार्ता को लेकर संदेह जताना शुरू कर दिया था। उनका कहना था कि अमरीका और दक्षिण कोरिया सीमा पर संयुक्त अभ्यास कर उसे धमकाने का प्रयास कर रहे हैं। किम के मन में संदेह जगाने के लिए खासतौर पर चीन को जिम्मेदार माना जा रहा है। यहां तक की किम के द्वारा की गई बयानबाजी को लेकर अमरीकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने चीन को भी कोसा था।

चीन नहीं चाहता दक्षिण और उत्तर कोरिया में दोस्ती

विशेषज्ञों की माने तो चीन ये कभी नहीं चाहेगा कि उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया एक देश के रूप में सामने आएं। इसमें उसका हित नहीं है। इसलिए वह चाहता है कि कोरियाई प्रायद्वीप के ये दो देश कभी एक न हों। एक होने से चीन को नुकसान होगा। दक्षिण कोरिया अमेरिका का समर्थक देश है और अन्‍य देशों की तुलना में काफी विकसित है। ऐसे में यदि ये दोनों देश एक होते हैं तो इनकी ताकत भी बढ़ जाएगी और चीन के परेशानी का सबब बन सकते हैं। यहां पर इस बात को भी नहीं भूलना चाहिए कि चीन और उत्तर कोरिया दोनों ही एक दूसरे को समर्थन देते हैं। ऐसे में यदि ये दोनों देश एक होते हैं तो चीन अपने समर्थक देशों में से एक को खो देगा।

Published on:
26 May 2018 09:29 am
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