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दोहरा सकती है साल 2013 की केदारनाथ त्रासदी, वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी

Disaster Alert : श्योक नदी का ग्लेशियरों ने रोका रास्ता, झील में इकट्ठा हो रहा ज्यादा पानी देहरादून के भू-विज्ञान संस्थान के शोधकर्ताओं के अनुसार झील के फटने से हो सकती है भयंकर तबाही

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Jul 03, 2020
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Disaster Alert

नई दिल्ली। साल 2013 में केदारनाथ (Kedarnath Tragedy) में आई त्रासदी को भला कौन भूल सकता है। चारो तरफ पानी ही पानी और उफनाती हुई नदियों को देख हर कोई सहम उठा था। तबाही का ये मंजर एक बार फिर दस्तक दे सकता है। क्योंकि ग्लेशियरों (Glacier) के कारण बनने वाली झीलें बड़े खतरे की ओर इशारा कर रही हैं। इसी सिलसिले में देहरादून (Dehradun) के भू-विज्ञान संस्थान के शोधकर्ताओं ने चेतावनी जारी की है। उनके मुताबिक वक्त रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो भयंकर विनाश (Devastation) हो सकता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि केदारनाथ आपदा के वक्त एक झील के फट जाने से उत्तराखंड में तबाही का तांडव हुआ था। वैसी ही एक झील हिमालय (Himalaya) के श्योक नदी के आसपास बनी हुई हैं। इस पर नजर रखना जरूरी है। अगर ये फटती है तो काफी नुकसान हो सकता है। जम्मू-कश्मीर के काराकोरम रेंज में स्थित श्योक नदी के प्रवाह को एक ग्लेशियर ने रोक दिया है। इसी के चलते वहां एक बड़ी झील बन गई है। इसमें लगातार पानी बढ़ रहा है। जरूरत से ज्यादा पानी इकट्ठा होने पर इसके फटने की आशंका है।

देहरादून के वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ जियोलॉजी के वैज्ञानिकों की ओर से जारी की गई चेतावनी में यह भी कहा गया कि यहां महज एक झील ही खतरा नहीं है। बल्कि यहां बनी कई झीलें हैं। ग्लेशियर के सामने आने की वजह से इनका पानी आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इंटरनेशनल जर्नल ग्लोबल एंड प्लेनेटरी चेंज में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक वैज्ञानिकों ने श्योक नदी के आसपास के हिमालयी क्षेत्र में 145 लेक आउटबर्स्ट की घटनाओं का पता लगाया। साथ ही इनका एक विश्लेषण तैयार किया।

एनालिसिस रिपोर्ट से पता चला कि पाक अधिकृत कश्मीर वाले काराकोरम क्षेत्र में ग्लेशियर में बर्फ की मात्रा बढ़ रही है। जिससे नदियों का प्रवाह रुक रहा है। इससे पहले साल 1920 में श्योक नदी के ऊपरी हिस्से में मौजूद कुमदन समूह के ग्लेशियरों ने भी कई बार नदी का रास्ता रोका है। जिसके चलते कई छोटे—बड़े हादसे हुए थे। इन्हीं में से 146 घटनाओं की डिटेल्स शोधकर्ताओं ने जमा की। इनमें 30 बड़ी आपदाएं भी शामिल हैं। वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ जियोलॉजी के वैज्ञानिक डॉ. राकेश भाम्बरी का कहना है कि उनकी टीम लोगों को संकट से बचाना चाहती है। इसलिए वे लगातार इस पर नजर रख रहे हैं। जिससे एक अलर्ट सिस्टम तैयार किया जा सके।

Published on:
03 Jul 2020 10:38 am