
मोहाली : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को मोहाली पंजाब में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आइआइएसइआर) के सातवें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान के तीन प्रमुख उद्देश्य हैं, जो पथ-प्रदर्शक प्रकाश की तरह काम करते हैं। उन्होंने कहा कि मोहाली ज्ञान की अर्थव्यवस्था, सूचना प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी और जैवसूचना विज्ञान का केंद्र बन गया है और आइआइएसइआर को संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र का आधार बनना चाहिए।
राष्ट्र निर्माण में विज्ञान व टेक्नोलॉजी की बड़ी भूमिका
कोविंद ने कहा कि निरंतर राष्ट्र निर्माण में पहले विज्ञान और टेक्नोलॉजी की भूमिका होनी चाहिए। जिस तरह से हमारा राष्ट्र विकास की दिशा में अग्रसर है और हमारा समाज बदल रहा है, उसी तरह हमारी जरूरतें भी बदल रही हैं। इसके बावजूद विकासपरक सवालों के जवाब तलाशने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी की जरूरत हमेशा बनी रहेगी।
विज्ञान के सामने हैं कई चुनौतियां
राष्ट्रपति ने कहा कि देश के सामने जलवायु परिवर्तन से लेकर उत्पादन लागत में कमी लाने, प्रभावकारी स्वास्थ्य सेवा के समाधान तलाशने, किसानों की उत्पादकता बढ़ाने और पानी की कमी की चुनौतियों का सामना करने से जुड़े कई सवाल हैं। इसके अलावा विज्ञान और प्रौद्योगिकी का व्यापार और उद्योग के साथ परस्पर सहजीवी संबंध है। उत्पादों का अन्वेषण और नवोन्मेषी प्रक्रम, प्रयोगशालाओं के अध्ययन का उपयोग वाणिज्यिक रूप से व्यावहारिक उत्पादों में करना, दक्षता बढ़ाने में प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करना, उद्यम और रोजगार जैसे कई क्षेत्र हैं, जहां विज्ञान और वाणिज्य में तालमेल हो सकता है।
ज्ञान की सीमाओं में विस्तार में भी अहम भूमिका
अपनी बात आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि वैज्ञानिक शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों का मौलिक नवाचार करने और ज्ञान की सीमाओं को विस्तार देने में अहम स्थान है। यह बुनियादी और मेरे विचार से वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए सबसे अहम है।
आगे आ रही हैं लड़कियां
कोविंद ने स्वर्णपदक हासिल करने और अकादमिक प्रदर्शन में बेहतर करने के लिए लड़कियों की प्रशंसा भी की। बता दें कि संस्थान के 152 स्नातकों में 40 फीसदी लड़कियां हैं और अकादमिक विशिष्टता के चार पुरस्कारों में तीन पुरस्कार लड़कियों ने जीते हैं।