पिछले चार साल के अंदर आंतरिक और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा की वजह से आतंकी शहरी इलाकों में कोई भी बड़ा आतंकी हमला नहीं कर पाए हैं।
नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार अपने चार पूरे होने का जश्न मना रही है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत उनकी कैबिनेट के तमाम मंत्री सरकार के कामकाज को जनता के बीच रख रहे हैं। इसी मौके पर पिछले चार साल की उपलब्धियों को लेकर गृहमंत्री राजनाथ सिंह एक टीवी कार्यक्रम में पहुंचे। यहां उन्होंने देश की सुरक्षा और कश्मीर के मुद्दे पर कई अहम सवालों का जवाब दिया।
चार साल में शहरी इलाकों में हमले को अंजाम नहीं दे सके आतंकी
मोदी सरकार के चार साल पूरे होने की खुशी के मौके पर सरकार की उपलब्धियों पर बात की जा रही है। ऐसा नहीं है कि मोदी सरकार ने पिछले चार सालों के अंदर अच्छा काम नहीं किया। अगर विपक्ष के सवालों को नजरअंदाज किया जाए तो ये सामने आता है कि मोदी सरकार ने कई स्तरों पर अच्छा काम किया है। कुछ मुद्दों को उठाकर अगर मोदी सरकार की तुलना यूपीए सरकार से की जाए तो बड़ी उपलब्धियां सामने आती हैं। बात करें आतंकवाद और देश की सुरक्षा की तो पिछले चार सालों में भारत सरकार की एक बड़ी कामयाबी ये रही है कि भारतीय सेना ने आतंकवाद को सीमा तक ही समेट कर रख दिया है। ये अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है कि चार सालों में आतंकी शहरी इलाकों का रूख नहीं कर पाए हैं। हालांकि सीमावर्ती इलाकों में भी आतंकी हमलों की संख्या काफी ज्यादा है।
भारतीय सेना ने आतंकियों को सीमावर्ती इलाकों से नहीं बढ़ने दिया आगे
अगर 2014 के बाद से आतंकी हमलों की लिस्ट उठाकर देखी जाए तो सामने आता है कि जम्मू-कश्मीर और पठानकोट जैसे इलाकों में ही आतंकी हमलों को अंजाम दिया गया है। हमारे देश की फौज इतनी मुस्तैदी के साथ आतंकियों का सामना करती है कि उन्होंने आतंकियों को शहरी इलाकों की तरफ बढ़ने ही नहीं दिया है। आपको बता दें कि यूपीए की सरकार में 26/11 मुंबई अटैक और दिल्ली में हुए बम धमाके बड़े आतंकी हमले थे। मौजूदा सरकार के साथ-साथ ये देश की सेना की भी बड़ी कामयाबी है। सेना आतंकियों को पठानकोट एयरबेस तक रोकने में कामयाब रही है। हालांकि इसके बावजूद भी कश्मीर और सीमावर्ती इलाकों में होने वाले आतंकी हमले भी निंदनीय है और देश की जनता सरकास से ये उम्मीद करती है कि आतंकवाद पर कड़ा प्रहार किया जाए और कश्मीर में अमन-चैन आ सके।
2014 के बाद हुए बड़े आतंकी हमले
- 5 दिसंबर, 2014: मोहरा-उरी
बारामुला के उरी सेक्टर में मोहरा में सेना के 31 फील्ड रेजिमेंट पर हमला हुआ जिसमें एक लेफ्टिनेंट कर्नल और 7 जवान शहीद हुए। इसके अलावा जम्मू कश्मीर के एक एएसआई और 2 कांस्टेबल शहीद हुए।
- 27 जुलाई 2015: गुरदासपुर
आतंकियों ने पंजाब के गुरदासपुर में दीना नगर पुलिस स्टेशन को निशाना बनाया था। इस हमले को तीन आतंकियों ने अंजाम दिया था। इस हमले में एसपी सहित 4 पुलिसकर्मी और 3 सीविलियन भी मारे गए थे।
- 2 जनवरी 2016: पठानकोट
पठानकोट एयरबेस पर हुआ ये आतंकी हमला हिंदुस्तान पर काफी बड़ा प्रहार था। साल के दूसरे ही दिन जैश के आतंकियों ने घुसपैठ कर पठानकोट एयरबेस को निशाना बनाया था। 4 दिन लंबे चले इस हमले में 7 जवान शहीद हुए थे। हमले में पाक सेना भी शामिल थी।
- 4 जून 2016: अनंतनाग
इसी साल जून में आतंकियों ने अनंतनाग की चेकपोस्ट हमला किया गया जिसमें 1 एएसआई और एक जवान शहीद हुआ।
- 26 जून 2016: पंपोर
पंपोर के पास श्रीनगर हाइवे पर सीआईपीएफ काफिले पर हमला किया गया जिसमें 8 जवान शहीद हुए और 20 जख्मी हो गए थे।
- 17 अगस्त 2016: ख्वाजा बाग हमला
हिजबुल संगठन ने श्रीनगर-बारामूला हाईवे पर सेना के काफिले पर हमला किया जिसमें 8 जवान शहीद हुए।
- 11 सितंबर 2016: पुंछ
यह हमला पठानकोट एयरबेस की तरह हुआ था। 3 दिन लंबे चले इस हमले में 6 सुरक्षाकर्मी मारे गए साथ ही 4 आतंकी भी मारे गए।
- 18 सितंबर 2016: उरी
उरी में आर्मी कैंप पर हुआ आतंकी हमला अभी तक के बड़े हमलों में से एक था। इस आतंकी हमले में हमारे 19 जवान शहीद हो गए थे। आतंकियों ने आर्मी कैंप में सो रहे जवानों पर हमला बोला था। मौके पर ही जवानों ने 10 आतंकियों को मार गिराया था। इस आतंकी हमले के करीब एक महीने बाद ही भारत ने सीमा पार जाकर सर्जिकल स्ट्राइक की थी, जिसमें पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुंचा था।