छत्तीसगढ़ में हिंदू युवती से शादी करने के लिए एक 33 वर्षीय मुस्लिम युवक ने हिंदू धर्म अपना लिया। फिर भी पत्नी नहीं मिली युवक ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ में हिंदू युवती से शादी करने के लिए एक 33 वर्षीय मुस्लिम युवक ने हिंदू धर्म अपना लिया। लेकिन जब लड़की के माता-पिता ने उसे युवक के साथ भेजने से मना कर दिया, तो युवक ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मोहम्मद इब्राहिम सिद्दिकी नामक युवक ने शादी के लिए इस्लाम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म अपना लिया। इस युवक ने अब अपना नाम बदलकर आर्यन आर्य रख लिया। इसके बाद आर्यन ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और और कहा कि अदालत ने पत्नी के परिवार को निर्देशित करने के लिए गलत तरीके से इनकार कर दिया है कि वह उनके साथ रहे।
इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड ने छत्तीसगढ़ सरकार से प्रतिक्रिया मांगते हुए याचिका की प्रतिलिपि मांगी है। युवक का कहना है कि इसके बाद उसे और उसकी पत्नी को जान से मारने की धमकी दी जा रही है। इसकी वजह यह है कि उसकी पत्नी से परिवार की मर्जी के खिलाफ उससे शादी की। आर्यन का कहना है कि उसके सुसराल वाले और कुछ अन्य लोगो उसे धमका रहे हैं।
युवक के मुताबिक उसकी पत्नी ने हाईकोर्ट को बता दिया था कि वो 23 साल की है और उसने अपनी मर्जी से शादी की है। लेकिन हाईकोर्ट ने युवती को दो ही विकल्प दिए कि या तो वो अपने माता-पिता के साथ रहे या फिर छात्रावास में। याचिकाकर्ता के मुताबाकि पिछले 2-3 सालों से दोनों के बीच प्रेम संबंध थे। बीती 23 फरवरी 2018 को युवक धर्म परिवर्तन कर हिंदू बन गया और शादी के लिए अपना नाम बदलकर आर्यन आर्य बन गया। दोनों ने 25 फरवरी 2018 को छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित आर्य समाज मंदिर में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार शादी की।
याचिका में युवक ने कहा कि शादी के बाद उसकी पत्नी अंजली जैन वापस धामतरी स्थित अपने घर चली गई, लेकिन तुरंत अपने परिजनों को इस बारे में जानकारी नहीं दी। जब उनके माता-पिता को इस शादी के बारे में पता चला तो दोनों ने योजना बनाई कि युवकी परिजनों को बिना बिताए घर छोड़ देगी और वे साथ में रहने लगेंगे। इसके बाद 30 जून को युवती ने घर छोड़ दिया। लेकिन इससे पहले कि वो अपने पति के पास पहुंचती, पुलिस ने उसे पकड़ लिया और महिलाओं के लिए बनाए गए सखी सेंटर शेल्टर होम में ले गई।
आर्यन का आरोप है कि पुलिस ने उसका गलत बयान दर्ज करवाया कि वो अपने पिता के साथ रहना चाहती थी, इसलिए उसे पिता को सौंप दिया गया। इसके बाद आर्यन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अदालत ने अंजली और उसके पिता को 30 जुलाई को पेश होने का आदेश दिए। अंजली से बातचीत के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि उसने अवैध रूप से रखे जाने के संबंध में अपने माता-पिता पर लगाए आरोपों का खंडन किया। याचिका में लिखा है कि अदालत ने आदेश सुनाया, "अंजली अपने स्वतंत्र दिमाग से कुछ सोच सके इसके लिए उसे कुछ वक्त के लिए पर्याप्त खुला स्थान चाहिए।"
बता दें कि यह मामला भी हादिया केस जैसा ही है, जिसमें केरल की एक हिंदू युवती ने मुस्लिम युवक से शादी के लिए धर्म परिवर्तन कर लिया था और बीते 9 अप्रैल को सर्वोच्च न्यायालय ने इस संबंध में केरल हाईकोर्ट के आदेश को दरकिनार करते हुए दोनों के बीच इस शादी को वैध करार दिया था।