दरअसल पुणे पुलिस ने नक्सल कनेक्शन के संदेह में देश भर के पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। जिसको लेकर देशभर में बवाल मच गया।
पुणे: भीमा कोरेगांव मामले पर पुलिस ने चार्जशीट दायर करने के लिए कोर्ट से समय मांगा है। पुणे पुलिस ने पुणे कोर्ट में एक याचिका दायर कर चार्जशीट फाइल करने के लिए समय बढ़ाने की अपील की । दरअसल, कुछ दिनों पहले पुणे पुलिस ने नक्सल कनेक्शन के संदेह के आरोप में देश भर के पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। जिसको लेकर देशभर में बवाल मच गया। विपक्षी दलों ने जमकर इसकी आलोचना की। साथ ही सरकार को घेरा था। वामपंथ बुद्धिजीवियों की गिरफ्तारी के विरोध में इतिहासकार रोमिला थापर और अन्य चार कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर की थी। याचिका के माध्यम से गिरफ्तार कार्यकर्ताओं की रिहाई का अनुरोध किया गया। इसके अलावा स्वतंत्र जांच कराने का अनुरोध भी किया गया।
विरोध को रोका गया तो लोकतंत्र टूट जाएगा
गौरतलब है कि नक्सल कनेक्शन में गिरफ्तार किए गए पांचों लोगों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को झटका देते हुए सभी आरोपी को नजरबंद रखने का आदेश दिया। साथ ही शीर्ष कोर्ट ने 4 सितंबर तक केंद्र और महाराष्ट्र सरकार को जवाब देने को कहा। कोर्ट ने सराकर को नोटिस जारी कर पूछा कि इन लोगों के आरोप क्या है। सुप्रीम कोर्ट ने भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तारी की याचिका पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि मतभेद लोकतंत्र का सेफ्टी वॉल्व है इसे रोका तो लोकतंत्र टूट जाएगा। विरोध को अगर यहां रोका गया तो लोकतंत्र टूट जाएगा।
पुलिस ने पर्याप्त सबूत का किया दावा
वहीं, इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के मंत्री दीपक केसरकर का कहना ने कहा कि जब तक पुलिस के पास सबूत नहीं होते हैं, वह एक्शन नहीं लेती है। वहीं पुणे पुलिस की सफाई वहीं पुणे पुलिस ने प्रेस वार्ता कर कहा कि उनके पास पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। आरोपियों के पास से लैपटॉप, दस्तावेज जब्त हुए हैं। जिसमें नक्सल कनेक्शन की चर्चा है।