नई शिक्षा नीति 21वीं सदी के नए भारत की नींव रखेगी। नई नीति सीखने और सिखाने के अनुभव को नए सिरे से जीवंत बनाने का काम करेगी। उच्च शिक्षा में शोध और नवाचार को बढ़ावा देना हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
नई दिल्ली। नई शिक्षा नीति पर आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ( Prakash Javadekar ) ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 आगामी वर्षों में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला साबित होगा। यह नीति 21वीं सदी की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक प्रभावी नींव डालने का जरिया भी बनेगा।
केंद्रीय मंत्री ने दिल्ली में पारले तिलक विद्यालय एसोसिएशन के शिक्षक दिवस समारोह के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम में इस बात का दावा किया। उन्होंने कहा कि अगले 10 वर्षों में भारत का सकल नामांकन अनुपात 25 प्रतिशत से बढ़कर दो गुना हो जाएगा। साथ ही पहले की तुलना में ज्यादा बच्चों को शिक्षा व्यवस्था से जुड़ने का मौका मिलेगा।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जावड़ेकर ने कार्यक्रम में शामिल लोगों को एक वेबिनार के जरिए संबोधित किया। उन्होंने बताया कि एनईपी—2020 देश के युवाओं को पहले से ज्यादा सशक्त बनाएगी। नई शिक्षा नीति 21वीं सदी में देश को तेजी से आगे ले जाने में मददगार भी साबित होगी। इतना ही नहीं यह स्टूडेंट्स और शिक्षकों को सीखने और सिखाने के अनुभव को नए सिरे से जीवंत बनाने का काम करेगी।
इसी तरह नई शिक्षा नीति में शामिला सकल नामांकन अनुपात ( जीईआर ) शिक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाला एक सांख्यिकीय मापक है। जीईआर से स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों पर छात्रों के नामांकन की संख्या का आकलन करने में मददगार साबित होगी। यह उच्च शिक्षण संस्थानों के व्यापक भौगोलिक विस्तार और शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती मांगों को पूरा करेगा।
शताब्दी वर्ष कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी की छ़ात्र पहले से ज्यादा महत्वाकांक्षी हैं। इतना ही नहीं, देश की आर्थिक समृद्धि ने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए अभिभावकों को भी आगे आने का अवसर दिया है।
इसके अलावा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हमारे सामने शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के साथ उसे कारगर व सभी के लिए लाभकारी बनाने की चुनौती भी है। इसके साथ ही हायर एजुकेशन को विश्व स्तरीय बनाना होगा। शिक्षा के भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए देशभर में 3,000 अटल टिंकरिंग लैब्स स्थापित किए गए हैं। ये लैब मेडिकल, इंजीनियरिंग व उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नवीनता को बढ़ावा देगा।