इससे पता लगाया जा सकेगा कि गाड़ी डीजल से चल रही है या फिर पेट्रोल से। रजिस्ट्रेशन ईयर को भी आगे की विंडशील्ड पर लगाना होगा अनिवार्य
नई दिल्ली। बीते कुछ सालों से सुप्रीम कोर्ट प्रदूषण को लेकर दिल्ली सरकार की खिंचाई करता रहा है। दिल्ली में प्रदूषण की मुख्य वजह डीजल और पेट्रोल के पुराने वाहन हैं,जो प्रशासन की नजर में नहीं आ पाते हैं। इन पुराने वाहनों की वजह से देश में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। लेकिन अब दिल्ली में चल रहे वाहनों की आसानी से पड़ताल हो सकेगी और यह पता लगाया जा सकेगा कि गाड़ी डीजल से चल रही है या फिर पेट्रोल से।
रजिस्ट्रेशन ईयर भी कार के आगे लिखना होगा
असल में सरकार की योजना हर वर्ग के व्हीकल को कलर कोड देने की है। यही नहीं सरकार की योजना वाहनों के रजिस्ट्रेशन ईयर को भी आगे की विंडशील्ड पर लगाने की है। इससे जांच एजेंसियों को तुरंत पता चल जाएगा कि इस वाहन को दिल्ली में चलने की अनुमति है या फिर नहीं। दरअसल जांच दल को सड़क पर चलते वाहनों को पहचानने में दिक्कत होती है। अब इस तरह के वाहनों को दूर से ही पहचान लिया जाएगा। कलर कोडिंग की मदद से डीजल और पेट्रोल कार का पता आसानी से लगाया जा सकेगा। इस नियम की मदद से सड़क से पुराने वाहनों को हटाने में मदद मिल सकेगी।
वाहनों पर स्टीकर लगाए जाएंगे
बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिल्ली के प्रदूषण को लेकर सुनवाई करते हुए यह सलाह दी गई थी कि वाहनों पर स्टीकर लगाए जाने चाहिए। इन स्टीकरों में यह लिखा होना चाहिए कि वाहन डीजल,इलेक्ट्रिक,हाइड्रोजन, हाइब्रिड,बीएस-4 या बीएस-5 होगा। अथॉरिटीज का कहना है कि ऐसी तमाम रिपोर्ट हैं, जिनमें दिल्ली में प्रतिबंधित वाहनों के दौड़ने की बात कही गई है।
दस साल पुरानी डीजल गाड़ी प्रतिबंधित
दिल्ली में फिलहाल 10 साल पुरानी डीजल गाड़ी और 15 साल से पुरानी पेट्रोल की गाड़ी के चलने पर रोक है। कोर्ट के आदेश के कारण ऐसी गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन को रिन्यू करने की प्रक्रिया पर ही रोक लगा दी गई है। हालांकि मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस आदेश के बाद भी अथॉरिटीज के लिए उन वाहनों की पहचान करना मुश्किल हो रहा था,जो अपनी तय आयु के बाद भी दिल्ली की सड़कों पर दौड़ रहे हैं।