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संन्यासी बनना चाहते थे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, स्वामी आत्मास्थानंद महाराज ने रोक दिया था

Narendra Modi राजनीति में नहीं आना चाहते थे। वह संन्यास लेना चाहते थे। लेकिन स्वामी आत्मास्थानंद महाराज ने कहा कि आप लोगों का काम करने के लिए बने हैं।

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नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ( Narendra Modi) 2019 लोकसभा का चुनाव जीतकर लगातार दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री बनने वाले गिने-चुने राजनेताओं में से एक है। लेकिन यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि वह राजनीति में नहीं आना चाहते थे। वह संन्यास लेकर संन्यासी का जीवन बिताना चाहते थे। इस सिलसिले में उन्होंने अपने शुरुआती जीवन में कोशिश भी की थी, लेकिन कुछ ऐसा घटा कि वह राजनीति में आ गए।

स्वामी स्वामी आत्मास्थानंद महाराज के सामने संन्यास की जाहिर की इच्छा

साल 1966 में स्वामी आत्मास्थानंद महाराज गुजरात के नगर राजकोट रामकृष्ण आश्रम में आए थे। उस समय नरेंद्र मोदी 16-17 साल के युवा थे और वह स्वामी विवेकानंद के जीवन से काफी प्रभावित थे। वह स्वामी आत्मास्थानंद महाराज से मिलने रामकृष्ण आश्रम आए और वहीं रह कर अध्यात्म सीखने लगे। स्वामीजी के साथ कुछ साल आश्रम में अध्यात्म सीखने के बाद नरेंद्र मोदी ने स्वामीजी के सामने अपनी इच्छा बताई कि वह संन्यासी बनना चाहते हैं। इस पर स्वामीजी ने मोदी से कहा कि वह संन्यास लेने के लिए नहीं बने हैं। उन्हें जीवन में कुछ और काम करना है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि राजकोट आश्रम किसी को संन्यासी बनने की दीक्षा नहीं देता है। अगर आप वाकई संन्यासी बनना चाहते हैं तो आपको बेलूर मठ जाना होगा।

बेलूर मठ के मठाधीश ने भी किया मना

स्वामी आत्मास्थानंद के मना करने के बाद नरेंद्र मोदी ने बेलूर मठ के तत्कालीन मठाधीश माधवानंद को चिट्ठी लिखकर अपनी इच्छा जताई। लेकिन स्वामी माधवानंद ने भी नरेंद्र मोदी के इस आग्रह को ठुकरा दिया और कहा कि आप लोगों के बीच काम करने के लिए बने हैं। इसके बाद उन्होंने राजनीति में उतरने का फैसला ले लिया।

स्वामी आत्मास्थानंद के निधन पर प्रधानमंत्री ने बताया था व्यक्तिगत क्षति

रामकृष्ण मठ और मिशन के प्रमुख स्वामी आत्मास्थानंद महाराज निधन 99 साल की उम्र में 19 जून 2017 को कोलकाता स्थित रामकृष्ण मिशन सेवा प्रतिष्ठान में हुआ था। उननके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुख जताते हुए इसे व्यक्तिगत क्षति बताया था। उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि स्वामी आत्मास्थानंद जी के पास बहुत नॉलेज था। उनके आदर्श और व्यक्तित्व को आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी। स्वामीजी का निधन उनके लिए व्यक्तिगत क्षति है। उन्होंने अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय उनके साथ बिताया है।

Updated on:
16 Sept 2019 11:03 pm
Published on:
16 Sept 2019 07:21 pm
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