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पूर्व केंद्रीय मंत्री और लालू यादव के करीबी Raghuvansh Prasad Singh नहीं रहे, पीएम मोदी ने जताया शोक

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के करीबी नेताओं में से एक थे रघुवंश बाबू। केंद्र सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए ईमानदार नेता की बनाई थी छवि।

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raghuvansh prasad singh
आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के करीबी नेताओं में से एक थे रघुवंश बाबू।

नई दिल्ली। बिहार के कद्दावर नेता और लालू यादव के करीबी डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह ( Raghuvansh Prasad Singh ) का रविवार को निधन हो गया। उनका दिल्ली के एम्स में इलाज चल रहा था। वह आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के करीबी नेताओं में से एक थे। वह केंद्र सरकार में कई बार मंत्री पद की जिम्मेदारी मिली जिसका उन्होंने ईमानदारी के साथ निर्वहन किया।

पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने अखिल भारती आयुर्विज्ञान संस्थान में रविवार को अंतिम सांसें ली। बिहार की राजनीति में रघुवंश बाबू के नाम से जाने-पहचाने जाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री को कुछ दिन पहले ही दिल्ली एम्स में भर्ती किया गया था।

पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने अखिल भारती आयुर्विज्ञान संस्थान में रविवार को अंतिम सांसें ली। बिहार की राजनीति में रघुवंश बाबू के नाम से जाने-पहचाने जाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री को कुछ दिन पहले ही दिल्ली एम्स में भर्ती किया गया था।

समाजवादी विचारधारा के कद्दावर नेता रघुवंश सिंह की हालत पिछले कुछ दिनों से गंभीर बनी हुई थी। जानकारी के मुताबिक उनको सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी। दिल्ली के एम्स में उपचाराधीन रघुवंश बाबू की निगरानी 4 डॉक्टरों की टीम लगी हुई थी।

रघुवंश बाबू के परिवार के सदस्यों ने रविवार सुबह में भी जानकारी दी थी कि वो अभी भी वेंटिलेटर पर ही हैं। उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है। वह 4 अगस्त को दिल्ली स्थित एम्स में इलाज कराने के लिए भर्ती हुए थे। पिछले चार दिनों से वेंटिलेटर पर थे।

बता दें कि रघुवंश प्रसाद सिंह बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी नेता लालू यादव के सबसे चहेते नेताओं में से एक थे। लालू यादव उनकी विशेष इज्जत करते थे। हाल ही में उन्होंने आरजेडी के युवा नेता तेजस्वी यादव की कार्यशैली से नाराज होकर पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।

जानकारी के मुताबिक जेडीयू के कुछ नेता उनसे लगातार संपर्क में बने हुए थे। सीसम नीतीश् कुमार की इच्छा थी कि आरजेडी में रघुवंश बाबू को उचित सम्मान नहीं मिल रहा है। इसलिए उन्हें जेडीयू में शामिल होने के लिए मना लिया जाए। ताकि उनकी सोच और आदर्श का पार्टी को लाभ मिल सके।

Updated on:
13 Sept 2020 02:52 pm
Published on:
13 Sept 2020 12:40 pm