बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने एम एम कलबुर्गी की हत्या के मामले में केंद्र सरकार, कर्नाटक सरकार और एनआईए को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
कर्नाटक के तर्कवादी और शोधकर्ता एमएम कलबुर्गी की हत्या के मामले में उनकी पत्नी उमा देवी ने केंद्रीय जांच एजेंसियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। उमा देवी ने कहा था कि अपनी पति की हत्या की जांच से वे संतुष्ट नहीं हैं। उन्हें कर्नाटक पुलिस की जांच पर कोई भरोसा नहीं। इसलिए अब वे चाहती हैं कि सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जज की निगरानी में उनके पति की हत्या की जांच स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) करें। उमा देवी का कहना हैं कि उन्हें मराठी के लेखक गोविंद पंसारे और नरेंद्र दाभोलकर की हत्याओं में समानता नजर आती है। उन्हें शक है कि तीनों के हत्यारे एक ही है। उन्हें डर हैं कि इसी तरह लापरवाही से जांच कुछ साल और चलती रहेगी और अंत में बिना अपराधी को पकड़े इस केस को बंद कर दिया जाएगा।
बुधवार को इस याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, कर्नाटक सरकार और एनआईए को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट की इस नोटिस का जवाब सरकार को 6 हफ्तों में देना होगा। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रएएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने केंद्र और दूसरी जांच एजेंसियों को नोटिस जारी किया है।
गौरतलब है कि 77 वर्षीय कलबुर्गी के सिर पर गोली उनके ही घर पर 2015 में मारी गई थी। अब तक हत्या करने वाला व्यक्ति पुलिस की पकड़ के बाहर है। हम्पी विश्वविद्यालय के पूर्व वाइस चांसलर कलबुर्गी ने मूर्ति पूजा के विरोध में बयान दिया था। इसके बाद से दक्षिणपंथी संगठनों ने उनका विरोध शुरू कर दिया। उसके बाद कलबुर्गी को विशेष सुरक्षा दी गई थी।