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सुप्रीम कोर्ट में इलेक्टोरल बॉन्ड पर आज होगी सुनवाई, EC ने जताई पारदर्शिता प्रभावित होने की आशंका

एडीआर ने इलेक्‍टोरल बॉन्‍ड के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी याचिका इलेक्‍टोरल बॉन्‍ड के पारदर्शी न होने से भ्रष्‍टाचार को मिलेगा बढ़ावा चुनाव आयोग को है इसके दुरुपयोग होने की आशंका
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Updated: 2 Apr 2019, 11:04 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट में इलेक्टोरल बॉन्ड पर आज होगी सुनवाई, EC ने जताई पारदर्शिता प्रभावित होने की आशंका

नई दिल्ली। एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) की याचिका पर मंगलवार को इलेक्टोरल बॉन्‍ड के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। याचिका के जरिए एडीआर ने इलेक्‍टोरल बॉन्‍ड से भ्रष्टाचार में बढ़ोतरी की आशंका जताई है। दूसरी तरफ सरकार का दावा है कि इससे राजनीतिक चंदे की प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और कालेधन पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।

EC पहले की राय पर कायम

इस मामले में चुनाव आयोग ( EC) ने शीर्ष अदालत के सामने अपना पक्ष रखते हुए साफ कर दिया है कि चुनावी बांड और कॉरपोरेट फंडिंग की सीमा हटाना राजनीतिक दलों की फंडिंग में पारदर्शिता को प्रभावित करेगा। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दिए अपने हलफनामें में 2017 में कानून मंत्रालय को भेजी अपनी राय का हवाला देते हुए उसी पर कायम रहने का फैसला किया है। इस मामले में EC की राय है कि स्कीम में डोनर की पहचान न होने और नॉन-प्रॉफिट कंपनियों को भी इलेक्टोरल बांड खरीदने की अनुमति देने से पारदर्शिता में कमी आने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।

इलेक्‍टोरल बॉन्‍ड को मिली चुनौती

सुप्रीम कोर्ट में असोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) की ओर से इलेक्टोरल बांड को चुनौती दी गई है। एसोसिएशन की याचिका में कहा गया है कि इस बांड को बड़े पैमाने पर कॉरपोरेट ने खरीदा है और पार्टियों को दिया है। इसके जरिए कॉरपोरेटर्स नीतिगत फैसले को प्रभावित कर सकते हैं। असल में सरकार इस दावे के साथ यह बांड लाई थी कि इससे पॉलिटिकल फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी और साफ-सुथरा धन आएगा। तमाम कोशिशों के बाद भी अभी इसके विपरीत ही होता दिख रहा है।

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2 Apr 2019, 11:04 AM IST
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