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नोटबंदी के 16 महीने बाद भी पुराने नोटों को बदलवाने का इंतजार कर रहा है यह बैंक

महाराष्ट्र में प्रत्येक वर्ष 54 हजार करोड़ रुपए फसल के लिए लोन दिया जाता है। इसमें से 40 प्रतिशत लोन डीसीसीबी के जरिए वितरित किया जाता है।

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Apr 08, 2018

नई दिल्ली । नरेंद्र मोदी की सरकार ने नोटबंदी के 16 महीने बाद 500 और 1000 रुपए के पुराने नोटों को सर्कुलेशन से वापस ले लिया है लेकिन महाराष्ट्र में जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों (डीसीसीबी) के एक समूह अभी भी 500 और 1000 रुपए के कुछ पुराने नोटों को बदलवाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बैंक अब पुराने नोटों को बदलवा सकते है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पुणे जिला सहकारी बैंक (पीडीसीसीबी) नोटबंदी के दौरान जमा हुए 500 और 1000 रुपए के पुराने नोटों में से 22.25 करोड़ रुपए को नगदी के तौर पर दिखा सकते हैं न कि घाटे के तौर पर, जैसा कि राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने डीसीसीबी को पहले निर्देशित किया था।

डीसीसीबी से छोटे और मध्यम किसानों को मिलता है फसल ऋण

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में कुल 31 जिला केंद्रीय सहकारी बैंक हैं। जो फसल ऋण को सीधे गांव के जरुरतमंद लोगों तक वितरित करते हैं। महाराष्ट्र में प्रत्येक वर्ष 54 हजार करोड़ रुपए का फसल के लिए लोन दिया जाता है। इसमें से 40 प्रतिशत लोन डीसीसीबी के जरिए वितरित किया जाता है। बता दें कि डीसीसीबी के जरिए वितरित किए गये लोन से गांव के छोटे और मध्यम श्रेणी के किसान लाभानवित होते हैं। क्योंकि छोटे और मध्यम श्रेणी के किसानों को बड़े व्यावसायिक बैंको से लोन लेने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। आपको बता दें कि डीसीसीबी के निदेशक मंडल के सदस्यों का चयन गांव स्तर पर होता है। हालांकि महाराष्ट्र में लगभग सभी डीसीसीबी में कांग्रेस और एनसीपी का नियंत्रण है।
बता दें कि फसल लोन के अलावा डीसीसीबी ग्रामीण उद्योगों जैसे डेयरी उद्योग, चीनी मिल्स आदि को भी ऋण मुहैया कराती है। साथ हीं ज्यादातर प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों, चीनी मिल्स के कामगारों और अन्य ग्रामीण उद्योगों में काम करने वाले लोगों के सैलरी अकाउंट्स इन्ही बैंकों से जुड़े होते हैं।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि डीसीसीबी के 11 बैंकों जिसमें महाराष्ट्र के 8 बैंक शामिल हैं, ने दावा किया है कि 147 करोड़ रुपए के पुराने नोटों के नगदी को रखने का अधिकार है, जिसे केंद्रीय बैंक ने बदलने से इंकार कर दिया था। डीसीसीबी ने कहा है कि 8 नवंबर 2016 को हुए नोटबंदी से पहले ही यह रकम बैंकों में जमा किए गए थे। रिजर्व बैंक ने 14 नवंबर 2016 को एक सर्कुलर जारी करते हुए 500 और 1000 रुपए के पुराने नोटों को डीसीसीबी में बदलवाने या जमा कराने पर प्रतिबंध लगा दिया। हालांकि इसके लिए कोई कारण नहीं बताया गया।
बता दें कि ऐसा अनुमान लगाया गया था कि 14 नवंबर तक महाराष्ट्र में डीसीसीबी में 2 हजार करोड़ से अधिक रुपए जमा किए गए। जबकि पुणे के बैंक में लगभग 600 करोड़ पुराने नोट जमा किए गए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई पर रिजर्व बैंक ने अपने इस फैसले के लिए कोई ठोस कारण नहीं बताया लेकिन कहा कि इन बैंकों के खातों में KYC (Know Your Customer) के नियमों का पालन नहीं किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश

बता दें कि जनवरी 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने इन खातों की सख्त जांच के बाद पुराने नोटों को बदलवाने के निर्देश दिये थे। जिसके बाद रिजर्व बैंक ने जून 2017 तक सभी पुराने नोटों को बदलवाने की छुट्ट दे दी। हालांकि इस दौरान नाबार्ड ने अपने जांच में पाया कि इन बैंकों में ऐसे एक भी खाते नहीं है जिसमें गबन और ब्लैकमनी को जमा किया गया हो।

Published on:
08 Apr 2018 04:26 pm
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