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COVID-19 पर नया खुलासा, इस वर्ग के बच्चों पर सबसे ज्यादा पड़ रहा है कोरोना का प्रभाव

देश में काफी तेजी से फैलता जा रहा है कोरोना वायरस (Coronavirus) कमजोर वर्ग के बच्चों पर COVID-19 का सबसे ज्यादा असर
2 min read
Aug 31, 2020
vulnerable groups Child Mostly Affected from coronavirus
कमजोर वर्ग के बच्चों पर कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा असर।

नई दिल्ली। कोरोना वायरस ( coronavirus in India ) महामारी पूरे देश में काफी तेजी से फैलता जा रहा है। आलम ये है कि पाबंदी और लॉकडाउन (India Lockdown) के बावजूद देश में 36 लाख लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। हर वर्ग पर इस महामारी का असर पड़ रहा है। लेकिन, इस महामारी को लेकर अब नया खुलासा हुआ है। ऐसा कहा जा रहा है कि इस वायरस का सबसे ज्यादा प्रभाव कमजोर वर्ग के बच्चों पर पड़ रहा है।

कमजोर वर्ग के बच्चों पर कोरोना का ज्यादा असर

दरअसल, जामिया मिलिया विश्वविद्यालय ( Jamia Millia University ) की ओर से एक वेबिनार का आय़ोजन किया गया। जिसमें कहा गया कि कमजोर वर्ग के बच्चों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। वेबीनार के माध्यम से बताया गया कि कैसे संसाधनों के अभाव में कमजोर वर्ग के बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। बेघर, प्रवासी और सड़कों पर रहने वाले बच्चों के सामने सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती होती है। यह हालात महामारी के दौरान कई गुना बढ़ गए। जामिया विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ सोशल वर्क और सेंटर फॉर अर्ली चाइल्डहुड डेवलपमेंट एंड रिसर्च ने संयुक्त रूप से इस राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया। जामिया की कुलपति, प्रो नजमा अख्तर ने कहा कि COVID-19 के कारण राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के बाद, दैनिक और प्रवासी मजदूरों ( Migrant Labourers ) को बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान हुआ। इसके अलावा पोस्ट लॉकडाउन में ऑनलाइन शिक्षा ( Online Education ) शुरू हुई, लेकिन इसके लिए इन गरीब बच्चों के लिए कोई तैयारी नहीं थी, क्योंकि उनके पास स्मार्ट फोन और अन्य जरूरी गैजेट्स जैसे साधन नहीं थे। इससे बच्चे ऑनलाइन शिक्षा से वंचित रह गए।

सरकार से की गई यह अपील

प्रोफेसर अख्तर ने सरकार से ऐसे बच्चों के लिए जरूरी कदम उठाने की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में बच्चों की सबसे अधिक आबादी है, इसलिए उन पर ज्यादा ध्यान दिए जाने की जरूरत है। यूनिसेफ के मुख्य संरक्षण विशेषज्ञ आफताब मोहम्मद ने केस स्टडी की मदद से प्रवासी बच्चों की असुरक्षा के हालात के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि बाल विवाह और तस्करी जैसे मुद्दे कानून और व्यवस्था की समस्या नहीं हैं, बल्कि ऐसी समस्याएं हैं जहां व्यवहार परिवर्तन की जरूरत होती है। नेशनल थेमैटिक मैनेजर-बाल संरक्षण के प्रभात कुमार ने स्लम क्षेत्र में रहने वाले परिवारों की परेशानियों पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि आपदाओं में आने वाले कुछ दिशानिर्देश और नीतियां कैसे भेदभावपूर्ण हैं।

Published on:
31 Aug 2020 05:25 pm
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