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चंद्रयान-2: अमरीका ने विक्रम लैंडर को लेकर हाथ खड़े किए, कहा-संपर्क साधने में वह इसरो की मदद नहीं कर सकता

अमरीका के वाणिज्य सचिव विल्बर रॉस ने इसरो प्रमुख के सिवन से की मुलाकात रॉस ने कहा कि विक्रम की संचार प्रणाली भारत के लिए आंतरिक थी

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Oct 07, 2019
ISRO News: स्पेस पोर्ट श्रीहरिकोटा पहुंचा Chandrayaan-2

वाशिंगटन। अमरीका की अंतरिक्ष एजेंसी ने चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम से संपर्क साधने में असमर्थता जताई है। हाल में भारतीय अतंरिक्ष अनुसंधान संगठन के प्रमुख के सिवन से मुलाकात करने पहुंचे अमरीका के वाणिज्य सचिव विल्बर रॉस ने कहा है कि विक्रम की लैंडिंग को लेकर नासा बहुत अधिक योगदान नहीं दे सका। रॉस ने कहा कि विक्रम की संचार प्रणाली भारत के लिए आंतरिक थी और इसलिए मुझे नहीं लगता कि हम इसके बारे में बहुत कुछ कर सकते हैं।

रॉस ने कहा कि विक्रम के बारे में एकत्रित किए गए आंकड़ों और सूचनाओं से पता चलता है कि विक्रम ने चांद पर लैंडिंग के दौरान पलटी खाई थी। हालांकी अभी तक इसकी कोई प्रमाणिकता नहीं है। इसके कारण, विक्रम के रिवर्स-थ्रस्ट उत्पादक इंजन, जो लैंडर को धीमा करने के लिए थे,वे आकाश की ओर उल्टे पड़े हैं। लैंडर को धीमा करने वाले इंजन बेकार पड़े हैं। विक्रम के साथ संचार उसी समय के आसपास खो गया था।

गौरतलब है कि इसरो ने सात सितंबर को विक्रम लैंडर से संपर्क खो दिया। लैंडिंग के प्रयास के अंतिम चरण में संपर्क खो गया था। इसरो विक्रम लैंडर के साथ संपर्क को फिर से स्थापित करने में असमर्थ रहा है। संचार को फिर से स्थापित करने की संभावना अब किसी के पास नहीं है क्योंकि रात चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में है, जहां विक्रम ने लैंडिंग का प्रयास किया। रात के दौरान क्षेत्र में तापमान शून्य से 200 डिग्री सेल्सियस तक कम हो जाता है। विक्रम के पास कोई भी हीटिंग उपकरण नहीं है, ऐसे में ठंड से बचने की संभावना कम ही है।

इसरो के अलावा, अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन भी विक्रम के भाग्य को निर्धारित करने के प्रयासों में शामिल रही है। बीते महीने की शुरुआत में, नासा ने विक्रम के लैंडिंग स्थल की तस्वीर खींचने के लिए अपना लूनर रिकॉइनेंस ऑर्बिटर भेजा था। जब एलआरओ लैंडिंग साइट की छवि बनाने में सक्षम तो था, मगर विक्रम को ढूंढ़ नहीं पाया क्योंकि चंद्रमा पर लंबे समय तक छाया रहने के दौरान तस्वीर शाम को ली गई थी।

बेंगलुरु में मीडिया से बात करते हुए, अमरीकी के वाणिज्य सचिव विल्बर रॉस ने कहा कि विक्रम की संचार प्रणाली भारत के लिए आंतरिक थी। उन्हें नहीं लगता कि अमरीका इसके बारे में बहुत कुछ कर सकते हैं ... सटीक कारण का पता लगाना कठिन है।"

Updated on:
07 Oct 2019 11:02 am
Published on:
07 Oct 2019 09:57 am
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