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हथियारों का सबसे बड़ा बाजार है भारत, दुनिया के बड़े देशों की है नजर

पाकिस्तान और चीन से बढ़ते भूगर्भीय खतरों के साथ प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के साथ घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की कोशिश की है
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India weapon import
हथियारों का सबसे बड़ा बाजार है भारत, दुनिया के बड़े देशों की है नजर

नई दिल्ली। हथियारों के प्रसार का आंकलन करने वाले एक स्वतंत्र संस्थान स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) द्वारा जारी किए गएनए आंकड़ों के मुताबिक 2012-16 के बीच भारत हथियारों का विश्व में सबसे बड़ा आयातक देश था। हथियारों की कुल वैश्विक बिक्री का 13 प्रतिशत अकेले भारत को बेचा गया। 2007-11 और 2012-16 के बीच भारत ने अपने हथियारों के आयात में 43 प्रतिशत की वृद्धि की। पिछले चार वर्षों में भारत के आयात अपने क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों चीन और पाकिस्तान की तुलना में कहीं अधिक बढ़े हैं। इन आकड़ों को देखकर सवाल उठता है कि आखिर भारत इतने हथियार क्यों और किसलिए खरीदता है ?

क्यों खरीदता है भारत इतने हथियार

बताया जा रहा है कि चीन स्वदेशी उत्पादों के बल बूते खुद में सक्षम है, जबकि भारत रूस, यूएसए, यूरोपीय राज्यों, इज़राइल और दक्षिण कोरिया समेत कई आपूर्तिकर्ताओं से हथियार प्रौद्योगिकी पर निर्भर है। 2012-11 में सऊदी अरब हथियारों के आयात में 212 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2012-16 में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक था। इस समय भारत अमरीका सहित विश्व के पांच सबसे बड़े सैन्य व्यय करने वाले देशों में एक हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान और चीन से मिलने वाली संभावित सैन्य चुनौतियों के चलते भारत ने पिछले सालों कई देशों से हथियार खरीदे हैं। भारत के आसपास विकसित भूगर्भीय तनाव और स्वदेशी रक्षा उद्योग के कम विकसित होने के चलते वह आयातित हथियारों पर ही अधिक निर्भर है। 2017 में नई दिल्ली का रक्षा खर्च 5.5 प्रतिशत बढ़कर 63.9 अरब डॉलर हो गया है।

भारत को दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक देश कहा जाता है क्योंकि घरेलू रक्षा विनिर्माण उद्योग खस्ताहाल है। यही नहीं, भारत का घरेलू हथियार उद्योग लाल फीताशाही से भी ग्रसित है। इसके अलावा राज्य की स्वामित्व वाली रक्षा कंपनियों से रक्षा मंत्रालय द्वारा खरीद में अक्सर देरी होती है। हालांकि पाकिस्तान और चीन से बढ़ते भूगर्भीय खतरों के साथ प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के साथ घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की कोशिश की है।

भारत का बढ़ता रक्षा बजट

भारत के मामले में रक्षा खर्च में वृद्धि का मतलब यह नहीं है कि इसे सशस्त्र बलों या अत्याधुनिक उपकरणों के ऊपर खर्च किया जा रहा है। नई दिल्ली के रक्षा अध्ययन और विश्लेषण संस्थान की एक रपट के अनुसार रक्षा खर्च में वृद्धि ज्यादातर सेवारत कर्मियों के वेतन और पेंशन के लिए खर्च की जाती है। हालांकि एक संसदीय प्रश्न के जवाब में जारी किए गए रक्षा आंकड़ों से पता चलता है कि 2014 से भारत द्वारा हथियारों की खरीद में कमी आई है।

ये हैं दुनिया के बड़े हथियार निर्यातक

संयुक्त राज्य अमरीका दुनिया में अग्रणी हथियार निर्यातक है, जिसने 2007-11 की तुलना में अपने निर्यात में 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है।रूस दूसरे स्थान पर आता है जिसने अपने निर्यात को 23 प्रतिशत बढ़ालिया है।भारत अपने ज्यादातर हथियार रूस से खरीदता है।चीन भी हथियारों के निर्यात पर सीढ़ी दर सीढ़ी ऊपर चढ़ रहा है, जो अब फ्रांस और जर्मनी के लिए एक शीर्ष आपूर्तिकर्ता है।

Published on:
05 Oct 2018 03:15 pm