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Peru Earthquake: पेरू में 6.7 तीव्रता के भूकंप से कांप उठी धरती

Earthquake In Peru: पेरू में 6.7 तीव्रता के भूकंप से धरती कांप उठी है। यह भूकंप पहाड़ी क्षेत्र में आया।
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भारत

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Tanay Mishra

Aug 21, 2026

Earthquake

भूकंप (Representational Photo)

दुनियाभर में भूकंपों (Earthquakes) के मामले बढ़ते जा रहे हैं। हर दिन कहीं न कहीं भूकंप आ रहे हैं। अब पेरू (Peru) में भूकंप आया है। यह भूकंप अयाकुचो (Ayacucho) में अनिसो (Aniso) से 31 किलोमीटर नॉर्थवेस्ट में आया, जिसने देश के दक्षिणी एंडीज़ (Andes) पहाड़ी इलाके को हिला दिया। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 6.7 रही। भारतीय समयानुसा भूकंप गुरुवार, 20 अगस्त को देर रात 11 बजकर 30 मिनट (लोकल समयानुसार दोपहर 1 बजे) आया। इस भूकंप की गहराई 99 किलोमीटर रही। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (United States Geological Survey – USGS) ने भी भूकंप की पुष्टि की।

कई इलाकों में भूकंप का झटका हुआ महसूस

इस भूकंप की वजह से किसी के हताहत होने या नुकसान होने की जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। हालांकि भूकंप प्रभावित क्षेत्र और आसपास के कई इलाकों में इसका झटका महसूस हुआ। इस वजह से कई लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए। भूकंप की वजह से पहाड़ों से कुछ चट्टानें और रेत भी नीचे की ओर गिरी। हालांकि पहाड़ी क्षेत्र में और ज़्यादा गहराई में आए इस भूकंप की वजह से इसका प्रभाव कम रहा।

अक्सर आते हैं पेरू में भूकंप

पेरू में अक्सर भूकंप आते रहते हैं। इसकी वजह है इसका प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) की 'रिंग ऑफ फायर' (Ring of Fire) का हिस्सा होना, जहाँ अक्सर ही भूकंपीय गतिविधियाँ होती रहती हैं।

1970 में पेरू में आया था सबसे विनाशकारी भूकंप

पेरू में 31 मई 1970 को सबसे विनाशकारी भूकंप आया था। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 7.9 थी और इसकी गहराई 45 किलोमीटर थी। इस भूकंप की वजह से 66,794–70,000 लोगों की मौत हुई थी। करीब 50,000 लोग इस भूकंप की वजह से घायल हो गए थे। कई हज़ार लोग भूकंप की वजह से बेघर हो गए थे। ज़्यादातर मौतें भूकंप के झटले से नहीं, बल्कि माउंट हुआस्कारन (पेरू की सबसे ऊंची चोटी) के उत्तरी हिस्से में भूकंप की वजह से हुए मलबे के भयानक बहाव, जिसे 'अलुवियोन' कहा जाता है, से हुईं। बर्फ़, चट्टान और बर्फ का एक बड़ा टुकड़ा (जो 50–80 मिलियन क्यूबिक मीटर था) 300–335 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पहाड़ से नीचे गिरा और कुछ ही मिनटों में युंगाय और रानराहिरका कस्बों को कई मीटर कीचड़, बर्फ़, बड़े पत्थरों और मलबे के नीचे दबा दिया। भूकंप के केंद्र के पास के तटीय शहरों में कच्ची ईंटों से बनी इमारतों और नरम मिट्टी के कारण बड़ी संख्या में इमारतें ढह गईं, जिससे मरने वालों की संख्या में और इज़ाफा हुआ।