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मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर बने बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति, भारत को लेकर क्या है उनका रुख?

मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति चुने गए हैं। जानें कौन हैं फखरुल और भारत-बांग्लादेश रिश्तों को लेकर उनका क्या रुख रहा है।
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भारत

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Rahul Yadav

Aug 20, 2026

Bangladesh New President Mirza Fakhrul Islam Alamgir

मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर बने बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति (फोटो - आईएएनएस)

Bangladesh New President Mirza Fakhrul Islam Alamgir: बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर देश के 23वें राष्ट्रपति चुने गए हैं। संसद में हुए चुनाव में उन्हें 255 वोट मिले, जबकि विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार ओली अहमद को 88 वोट मिले। यह बांग्लादेश के राष्ट्रपति चुनाव में 35 साल बाद पहली बार है जब एक से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में थे।

फखरुल लंबे समय तक बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के महासचिव रहे हैं और पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। अगस्त 2026 में राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन्होंने पार्टी के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था।

कौन हैं मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर?

मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर बांग्लादेश की राजनीति के अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। वह 2016 से बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के महासचिव थे और लंबे समय तक पार्टी के संगठन और राजनीतिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभाते रहे।

शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के लंबे कार्यकाल के दौरान फखरुल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के प्रमुख विपक्षी नेताओं में रहे। इस दौरान उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया और उनके खिलाफ कई मामले दर्ज हुए। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी का दावा रहा है कि उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं पर बड़े पैमाने पर मामले दर्ज किए गए थे।

अब बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के सत्ता में आने के बाद फखरुल को देश के राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी मिली है। राष्ट्रपति का पद मुख्य रूप से संवैधानिक और औपचारिक है, लेकिन वह देश के राष्ट्राध्यक्ष और सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ होते हैं।

भारत को लेकर क्या है फखरुल का रुख?

भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर फखरुल का रुख टकराव के बजाय बातचीत और सहयोग का रहा है। फरवरी 2026 में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के रिश्तों को किसी एक मुद्दे तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा था कि भारत के साथ युद्ध या संघर्ष की बात करना सही नहीं है और दोनों देशों को बातचीत के जरिए अपने मतभेद सुलझाने चाहिए। उन्होंने भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार और विकास सहयोग को आगे बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया था।

शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर क्या कहा था?

फखरुल भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग का समर्थन कर चुके हैं। उनका कहना था कि हसीना के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए और बांग्लादेश चाहता है कि भारत उन्हें वापस सौंपे। हालांकि, उन्होंने साथ ही यह स्पष्ट किया था कि हसीना का मुद्दा भारत-बांग्लादेश के व्यापक संबंधों को रोकने की वजह नहीं बनना चाहिए। फखरुल ने कहा था कि दोनों देशों के बीच व्यापार, वाणिज्य और विकास से जुड़े रिश्ते आगे बढ़ते रहने चाहिए।

भारत को लेकर पहले क्या बोले थे फखरुल?

भारत को लेकर फखरुल का सबसे चर्चित बयान फरवरी 2026 में आया था। उन्होंने कहा था कि बांग्लादेश भारत के साथ युद्ध नहीं कर सकता और दोनों देशों को बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि जो लोग भारत के साथ युद्ध की बात करते हैं वे पागल हैं। साथ ही उन्होंने अमेरिका और चीन के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा था कि गंभीर मतभेदों के बावजूद देश एक-दूसरे के साथ काम कर सकते हैं।

भारत के साथ किन मुद्दों पर बातचीत की बात कही?

फखरुल ने भारत-बांग्लादेश संबंधों में पानी के बंटवारे, सीमा पर होने वाली घटनाओं और व्यापार जैसे मुद्दों पर बातचीत की जरूरत बताई थी। उनका कहना था कि इन मुद्दों को बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि भारत बांग्लादेश का सबसे बड़ा पड़ोसी है और दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में व्यापारिक संबंध हैं। इसलिए भारत को पूरी तरह नजरअंदाज करना व्यावहारिक नहीं होगा।

35 साल बाद हुआ मुकाबले वाला राष्ट्रपति चुनाव

फखरुल का राष्ट्रपति चुना जाना इसलिए भी खास है क्योंकि बांग्लादेश में 35 साल बाद राष्ट्रपति चुनाव में एक से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में थे। संसद में हुए मतदान में फखरुल को 255 और ओली अहमद को 88 वोट मिले। इस चुनाव के साथ बांग्लादेश की राजनीति में फखरुल की भूमिका भी बदल गई है। लंबे समय तक बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के संगठनात्मक चेहरे के तौर पर काम करने के बाद अब वह देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों में से एक पर पहुंच गए हैं।