मेट्रो जैसी सुविधा से युक्त इस ट्रेन का 150 किमी प्रति घंटे से भी ज्दाया होगी रफ्तार
मुरादाबाद. भारतीय रेलवे अब पूरी तरह अपनी छवि बदलने की जुगत में जुट गया है। लेटलतीफी के लिए बदनाम भारतीय रेलवे ने अब अपनी तस्वीर बदलने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। इसी के तहत अब तेजी के साथ हाई-स्पीड ट्रेनों पर काम शुरू कर दिया गया है। भारतीय रेल एक तरफ जहां राजधानी की जगह टी-18 ट्रेन चलाने जा रही है। वहीं, अब मेट्रो की तर्ज पर हाई-स्पीड ट्रेन उतारने पर भी काम शुरू कर दिया है। जल्द ही एक ऐसे ट्रेन का ट्रायल शुरू होने जा रहा है, जो 150 किलोमीटर प्रतिघंटा से भी ज्यादा की स्पीड से फर्राटेदार तरीके से चलेगी। या यूं कहे कि भारतीय रेल ने पहली बार बिना इंजन वाली ट्रेन तैयार कर ली है। अगर सब कुछ तय वक्त पर हुआ तो जनवरी तक यानी तीन महीने के बाद इस ट्रेन में यात्री सफर कर सकेंगे। इसकी वजह यह है कि अगले ढाई से तीन महीने तक इस ट्रेन का अलग-अलग स्पीड पर ट्रायल किया जाएगा। इसके बाद ही कमिश्नर रेलवे सेफ्टी की मंजूरी मिलने के बाद इसे दिल्ली-भोपाल रूट पर चलाया जाएगा।
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रेलवे का कहना है कि मुरादाबाद में पहले इस ट्रेन का 115 किलोमीटर की स्पीड पर ट्रायल किया जाएगा। यहां लगभग एक महीने तक यह ट्रायल चलेगा। इस दौरान देखा जाएगा कि ट्रेन के सारे सिस्टम ठीक तरह से काम कर रहे हैं या नहीं। इसके अलावा इस दौरान यह भी चेक किया जाएगा कि ट्रेन चलाने के वक्त जितनी भी तरह की प्रक्रियाएं होती हैं, वह ट्रायल के दौरान ठीक तरह से काम कर रहें हैं या नहीं। सब कुछ ठीक रहा तो इसके बाद इस ट्रेन का आगरा सेक्शन पर 130 से 150 किलोमीटर की स्पीड पर ट्रायल किया जाएगा। यह ट्रायल भी अगर सही रहा तो इसकी स्पीड बाद में और बढ़ाई जाएगी। उम्मीद की जा रही है कि जनवरी तक ये सभी ट्रायल पूरे हो जाएंगे। इसके बाद कमिश्नर रेलवे सेफ्टी से इसकी क्लीयरेंस मिलने के बाद जनवरी के अंत या फिर फरवरी में इस ट्रेन को पैसेंजरों के लिए शुरू कर दिया जाएगा।
इंडियन रेलवे के टॉप अफसर के मुताबिक सोमवार को भले ही इस तरह की ट्रेन को औपचारिक तौर पर रेलवे बोर्ड के चेयरमैन के सुपुर्द किया गया हो, लेकिन अभी यह ट्रेन चेन्नई में ही है और अगले एक सप्ताह तक आरडीएसओ चेन्नई में ही इस ट्रेन का स्ट्रैटेजिक टेस्ट करेगा। लगभग एक सप्ताह में जब यह टेस्ट पूरा हो जाएगा, उसके बाद ही इस ट्रेन को चेन्नई से मुरादाबाद लाया जाएगा। रेलवे बोर्ड के अफसरों के मुताबिक उम्मीद है कि अगले 10 दिन में यह ट्रेन मुरादाबाद पहुंचेगी। हालांकि, यह ट्रेन अपने ही सिस्टम से दिल्ली नहीं लाई जाएगी, बल्कि इस ट्रेन को रेलवे का परंपरागत इंजन ही खींचकर मुरादाबाद तक लाएगा। इसके बाद ही यह ट्रेन अपने सिस्टम से चलेगी। मेट्रो की तरह दोनों ओर चलने वाली इस ट्रेन में अलग से इंजन नहीं होगा, बल्कि ट्रेन के पहले कोच में ही इसका इंजन सिस्टम है।