मुरादाबाद

यूपी: घर में नहीं था कई दिनों से राशन, भूख से तड़प कर हो गई महिला की मौत

योगी सरकार में भूख से एक महिला की मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि पड़ोसी उसके बच्चे को खाना खिला रहे थे।
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muslim woman death due to hunger in yogi government

मुरादाबाद। योगी राज में भूख से तड़पकर मरने का सिलसिला जारी है। अभी हाल ही में यूपी के बरेली में भूख से तीन लोगों की मौत हो गई थी। अब ताजा मामला है मुरादाबाद का, जहां भूख और गरीबी से अमीर जहां (34 वर्ष) नामक एक महिला की मौत हो गई है। घटना के बाद से स्थानीय प्रशासन में हडकंप मच गया है। आलम यह है कि कोई भी भूख से मौत की घटना को मानने को तैयार नहीं है। वहीं, इस मामले में राज्य मंत्री भूपेन्द्र चौधरी ने कहा की घटना बेहद दुखद है। अगर महिला की भूख से मौत हुई है तो इसकी जांच कराई जाएगी और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।

यह है पूरा मामला...

मूल रूप से छजलैट के गांव फूलपुर के रहने वाले मो. यूनुस का परिवार जयंतीपुर में पुलिस चौकी के पास सलीम कुरैशी के मकान में किराए पर रहता है। यूनुस रिक्शा चलाता था। लेकिन, टीबी की बीमारी होने के बाद वह एक ठेकेदार के साथ पुणे चला गया। जहां वह चाय-बिस्किट का ठेला लगाता है। उसकी पत्नी अमीर जहां (34) यहां अपनी तीन बेटियों तबस्सुम (14), रहनुमा (12) और मुस्कान (10) के साथ रहती थी। तबस्सुम ने बताया कि उसके पिता ढाई महीने से घर नहीं आए इसलिए पैसे खत्म हो गए और घर में राशन तक नहीं बचा था। तीनों बहनों ने बताया कि तीन दिन से कुछ नहीं खाया था। बुधवार रात बच्चियों के सिसकने की आवाज सुनकर सामने रहने वाली शबाना उन्हें छह रोटियां दे गईं। शबाना का कहना है कि बच्चियों ने तो रोटी खा ली, लेकिन काफी कहने के बाद भी अमीर जहां ने कुछ नहीं खाया। गुरुवार सुबह अचानक उसकी तबियत ज्यादा बिगड़ गई और गुरुवार दोपहर पड़ोसियों की मदद से बेटियों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन डेढ़ घंटे के भीतर ही उसने दम तोड़ दिया।

BPL कार्ड तक नहीं था पीड़ित परिवार के पास

पड़ोसी फिरोज और रुकसाना ने बताया की ये लोग काफी दिनों से इस तरह का जीवन जीने को मजबूर थे। कई बार स्थानीय अधिकारीयों और पार्षद के पास भी गए कि बीपीएल कार्ड बन जाए। लेकिन, ऐसा हो नहीं पाया।

कर्ज दाता ने भी कर दिए थे हाथ खड़े

वहीं, अब तक उधार देने वाले दुकानदार रिजवान ने भी हाथ खड़े कर दिए। रिजवान ने बताया कि आखिर कब तक उन्हें उधार देता। उनसे पैसे मिलने की उम्मीदें जब खत्म हो गई तो उधार देना बंद कर दिया। हालात इस कदर खराब हो गए थे कि मकान का किराया भी तीन महीने से नहीं दिया गया था।

चंदा जुटाकर हुआ अंतिम संस्कार

फिलहाल, अब इस पूरे मामले की अधिकारीयों द्वारा जांच की बात की जा रही है। लेकिन, अभी भी उसकी बेटियों के लिए कोई मदद नहीं पहुंची है। मृतका के अंतिम संस्कार के लिए भी पड़ोसियों द्वारा चंदा किया गया।

Updated on:
26 Jan 2018 06:36 pm
Published on:
26 Jan 2018 03:47 pm