
मुस्तफा मस्जिद को नोटिस विवाद में बीकेयू टिकैत उठाए सवाल (फोटो: वीडियो ग्रैब)
Moradabad Mustafa Masjid: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में मुस्तफा मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (MDA) की ओर से जारी नोटिस की समय सीमा बीतने के बाद भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) भी मामले में खुलकर सामने आ गई है। संगठन के नेताओं ने मस्जिद कमिटी के लोगों से मुलाकात कर सहयोग का भरोसा दिया और किसी भी कार्रवाई की स्थिति में आंदोलन की चेतावनी दी है।
मुस्तफा मस्जिद दिल्ली-लखनऊ एनएच-9 के पास पाकबड़ा थाना क्षेत्र में स्थित है। एमडीए ने मस्जिद के निर्माण से जुड़े दस्तावेज और स्वीकृति संबंधी जानकारी पेश करने के लिए कमिटी को नोटिस जारी किया था। अब इस मामले में आगे प्राधिकरण क्या कदम उठाता है, इस पर सभी की नजर है।
मुस्तफा मस्जिद पहुंचकर भारतीय किसान यूनियन टिकैत के सदस्यों ने मस्जिद कमिटी के पदाधिकारियों से बातचीत की। संगठन ने कमिटी को मामले में सहयोग का भरोसा दिलाया। इसके बाद किसान नेताओं ने एमडीए की कार्रवाई को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। BKU के वरिष्ठ नेता शुभम राठी ने कहा कि किसी भी कार्रवाई से पहले संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने और जरूरी दस्तावेज पेश करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल नोटिस जारी करने के बजाय मामले के सभी पहलुओं को देखा जाना चाहिए।
किसान यूनियन की ओर से एमडीए को चेतावनी भी दी गई है। संगठन ने कहा कि अगर मस्जिद के खिलाफ कार्रवाई की जाती है तो उसे विरोध का सामना करना पड़ेगा। BKU की ओर से प्राधिकरण कार्यालय पर धरना देने की बात भी कही गई है। शुभम राठी ने मस्जिद से जुड़े मामले में धर्म के आधार पर कार्रवाई किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने आसपास के दूसरे निर्माणों का मुद्दा भी उठाया। साथ ही सवाल किया कि अगर मस्जिद के आसपास की जमीन निजी है तो उसे सरकारी जमीन किस आधार पर माना जा रहा है। हालांकि, ये आरोप और सवाल किसान यूनियन की ओर से उठाए गए हैं। इस पर एमडीए का पक्ष सामने आना बाकी है।
मामले की शुरुआत एमडीए के नोटिस से हुई। प्राधिकरण ने 21 अगस्त को मुस्तफा मस्जिद कमिटी को नोटिस जारी कर 3 सितंबर तक जवाब और जरूरी दस्तावेज पेश करने को कहा था। नोटिस में निर्माण की स्वीकृति और जमीन से जुड़े दस्तावेज मांगे गए थे।नोटिस में कथित तौर पर बिना स्वीकृति निर्माण किए जाने का भी उल्लेख किया गया था। कमिटी से यह स्पष्ट करने को कहा गया था कि संबंधित निर्माण को ध्वस्त करने का आदेश क्यों न जारी किया जाए। अब 3 सितंबर की समय सीमा गुजर चुकी है। ऐसे में अगला कदम क्या होगा, यही इस पूरे विवाद का सबसे अहम बिंदु बन गया है।
मस्जिद कमिटी और स्थानीय लोगों की ओर से दावा किया जा रहा है कि मुस्तफा मस्जिद करीब 40 वर्ष पुरानी है। नोटिस के बाद से कमिटी मामले को लेकर अपनी ओर से दस्तावेज और पक्ष रखने की तैयारी में है। वहीं, इस मामले में समाजवादी पार्टी के सांसद भी पहले विरोध जता चुके हैं। अब BKU टिकैत के मैदान में उतरने से विवाद को लेकर सियासी और सामाजिक चर्चा और तेज हो गई है। फिलहाल नजर एमडीए के अगले कदम और उसके आधिकारिक पक्ष पर है।
Updated on:
13 Sept 2026 06:21 pm
Published on:
13 Sept 2026 06:21 pm
