मुरादाबाद

Exclusive: इस वजह से कुत्ते हो रहे ज्यादा आक्रामक, हो जाइए सावधान

कुत्ते पैर पर या निचले हिस्से पर काटने के बजाय शहरी के ऊपरी हिस्से को निशाना बना रहे हैं।
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Updated: 30 Oct 2018, 11:04 AM IST
moradabad
Exclusive: इस वजह से कुत्ते हो रहे ज्यादा आक्रामक, हो जाइए सावधान

मुरादाबाद: जनपद में लगातार आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। सबसे ज्यादा आतंक ग्रामीण इलाकों में है जहां रोजाना दर्जनों लोगों को आवारा कुत्ते अपना शिकार बना रहे हैं। वहीँ पिछले दो से तीन महीनों में शहर में भी कुत्ते काटने के मरीज बढ़ने से अस्पताल पर दबाब बढ़ गया है। क्यूंकि एंटी रेबीज वैक्सीन का कोटा निर्धारित होता है। वहीँ अब कुत्ते पैर पर या निचले हिस्से पर काटने के बजाय शहरी के ऊपरी हिस्से को निशाना बना रहे हैं। डाक्टर इसे नस्लीय बदलवा बता रहे हैं।

ये है वजह

मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ बीके गुप्ता की माने तो पिछले कुछ समय में आवारा कुत्तों में नस्लीय बदलवा हुआ है। आवारा कुत्तों में भेड़िया और लोमड़ी की क्रॉस ब्रीड से नस्ल बदल रही है। लिहाजा उनका व्यवहार भी उसी तरह का हो रहा है। जो खतरनाक होता जा रहा है। ये कुत्ते सामन्य कुत्तों की बजाय सड़क चलते लोगों पर उछलकर हमला करते हैं और गर्दन और चेहरे को निशाना बनाते हैं।

रोजाना इतने हो रहे शिकार

जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 60 से 70 कुत्ता काटने के मरीज पहुंच रहे हैं। किसी किसी दी ये आंकड़ा 100 के पार भी हो जाता है। कई बार एक ही इलाके के लोग ज्यादा होते हैं।

बचाना होता है मुश्किल

जिला अस्पताल में डॉ बलराम के मुताबिक कुत्ते अब ज्यादा आक्रामक हो रहे हैं। उनके हमला करने का तरीका बदला है। पहले कुत्ते ज्यादातर पैर में काटते थे,लेकिन अब गर्दन और चेहरे को निशाना बना रहे हैं। इसलिए ऐसे मरीजों को रेबीज के साथ साथ सीरम लगाना जरुरी होता। वरना रेबीज का संक्रमण तेजी से फैलता है। उनके मुताबिक अब रोजाना चार से पांच मरीज ऐसे ही आ रहे हैं।

एक दर्जन से ज्यादा की मौत

यहां बता दें कि बीते एक साल में एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत कुत्ते काटने से हुई है। कई में रेबीज का इंजेक्शन लगने के बाद भी सुधार नहीं हुआ और मौत के आगोश में समां गए। डाक्टरों के मुताबिक ऐसे मरीजों में ज्यादातर में कुत्तों ने हमला मुंह या गर्दन पर किया था। जिससे संक्रमण सीधा तंत्रिका तंत्र पर फैलता है और ऐसे में मरीज को बचाना बहुत मुश्किल होता है। मरने वालों में बच्चों की संख्या ज्यादा है।

इसलिए हो जाते हैं आक्रामक

वहीँ पशु चिकित्सकों की माने तो बारिश के बाद कुत्तों का ब्रीडिंग सीजन शुरू होता है। इस समय ये ज्यादा आक्रामक हो जाते हैं। लिहाजा बच्चों को गली या घर के बाहर अकेले न छोड़ें न ही कहीं जाने दें।

नसबंदी भी शुरू हुई

शहर में नगर निगम ने कुत्तों की नसबंदी का कार्यक्रम जरुर शुरू किया है। लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में आवार कुत्ते हर इलाके में रोजाना शिकार बना रहे हैं। निगम अधिकारीयों के मुताबिक पहले चरण में 400 कुत्तों की नसबंदी होगी। उसके बाद उनका रिजल्ट देखने के बाद आगे कुत्तों की नसबंदी की जाएगी।

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30 Oct 2018, 11:04 AM IST
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