अब 1 अप्रैल से लागू होगी भावांतर योजना, जिले के 63 केन्द्रों पर कराए थे 7604 किसानों ने सरसों बिक्री हेतु पंजीयन, अब पंजीकृत किसानों का होगा सत्यापन
मुरैना. शासन ने इस बार सरसों समर्थन केन्द्रों पर न खरीदते हुए सीधे कृषि मंडियों में खरीद पर ही भावांतर योजना का लाभ देने की घोषणा की थी। लेकिन इस बार मंडी में पहले से भाव अधिक होने पर बड़ी संख्या में किसान भावांतर का इंतजार किए बिना ही सरसों को बेचने मंडी पहुंच रहा है। इन दिनों मंडी में सरसों की बंपर आवक हो रही है। सरसों के भाव अधिक होने से शासन की भावांतर योजना की हवा निकलती नजर आ रही है।
हर साल शासन सोसायटियों पर सरसों की खरीद करता था, उसके लिए समर्थन मूल्य पहले से ही निर्धारित रहता था लेकिन इस बार शासन ने भावांतर योजना लागू की है। इसमें ये था कि किसान सरसों मंडियों में ही बेचेगा लेकिन मंडी में जो भाव मिलेगा, उससे ऊपर की कीमत शासन किसानों के खाते में सीधे डालेगा लेकिन इसके लिए शासन ने 6200 रेट तय की है, अगर इससे नीचे का भाव मंडी में मिलता है तो उसके ऊपर की राशि शासन किसान के खाते में सीधे ट्रांसफर करेगा लेकिन शासन की इस योजना के शुरू होने से पहले ही हवा निकलती नजर आ रही है। किसानों का कहना हैं कृषि मंडी में 6500 से 6800 रुपए प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है यानि भावांतर योजना में जो रेट तय की है, उससे कहीं अधिक किसानों को लाभ पहले से ही मिल रहा है फिर इस योजना का मतलब ही क्या है।
अब होगा पंजीकृत किसानों का सत्यापन
रबी वर्ष 2025-26 में सरसों के लिए संचालित भावांतर योजना के अंतर्गत किसानों के पंजीयन की समीक्षा के दौरान यह पाया गया है कि जिलों में अपेक्षाकृत अधिक संख्या में पंजीयन हो रहे हैं। ऐसे में केवल पात्र किसानों को ही योजना का लाभ मिले। राज्य शासन द्वारा निर्णय लिया गया है कि योजना का क्रियान्वयन पंजीयन के गहन सत्यापन के पश्चात ही प्रारंभ किया जाएगा। इसी के तहत योजना की पूर्व निर्धारित प्रारंभ तिथि 23 मार्च को संशोधित कर अब 01 अप्रैल निर्धारित की गई है। निर्देश दिए गए हैं कि सरसों भावांतर योजना के अंतर्गत पंजीकृत सभी किसानों के डिजिटल क्रॉप सर्वे एवं अन्य भू-अभिलेखों का गहन एवं सावधानीपूर्वक सत्यापन सुनिश्चित किया जाए, ताकि अपात्र एवं त्रुटिपूर्ण पंजीयन को समय रहते चिन्हित किया जा सके।
शासन की भावांतर योजना पहले 23 मार्च से शुरू होनी थी अब 1 अप्रैल से शुरू होगी लेकिन मंडी में पहले से ही सरसों की बंपर आवक हो रही है। मार्च महीने में 2000 से 2500 क्विंटल सरसों रोजाना आवक हो रही है। पूरे महीने में 27669 क्विंटल सरसों की बिक्री मंडी में योजना के शुरू होने से पहले ही हो चुकी है।
कृषि उपज मंडी में सरसों के भाव बढ़ते देख किसानों ने योजना के शुभारंभ से पहले ही मंडी मेंंं सरसों की बिक्री शुरू हो चुकी थी। मंडी में सरसों 23 फरवरी से आना शुरू हो चुकी है। जिन किसानों ने भावांतर योजना में पंजीयन कराया, उन्होंने भी योजना के शुरू होने का इंतजार नहीं किया। उन्होंने भी अपनी सरसों मंडी में योजना के शुरू होने से पहले ही बेच दी।
शासन ने इस बार गेंहू का समर्थन मूल्य 2585 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है। गेंहू की खरीद 63 केन्द्रों पर 7 अप्रैल से होनी हैं लेकिन अभी तक केन्द्र नहीं बनाए गए हैं और न ही कोई व्यवस्थाएं जुटाई गई हैं। जिले के 11153 किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेंहू खरीद के लिए पंजीयन कराए जा चुके हैं।
हमनें सरसों का भावांतर योजना में पंजीयन कराया था लेकिन शासन ने 6200 रुपए प्रति क्विंटल मूल्य तय किया है जबकि मंडी में पहले से ही इससे अधिक भाव मिल रहा है, इसलिए हमने अपनी सरसों योजना के शुरू होने से पहले ही बेच दी।
शासन की भावांतर योजना 23 मार्च से शुरू हुई है, उसमें किसान को लाभ तब मिलता जब 6200 रुपए प्रति क्विंटल से कम भाव मंडी में मिलता लेकिन मंडी में तो पहले से ही भाव इससे कहीं अधिक चल रहा है, इसलिए योजना के शुरू होने से पूर्व ही बड़ी संख्या में किसान अपनी सरसों मंडी में बेच चुका है।
मंडी में पहले से ही सरसों के भाव अधिक मिल रहे हैं। इसलिए भावांतर योजना के शुरू होने से पूर्व ही सरसों की मंडी में बंपर आवक हो रही है। किसान मार्च महीने में 27669 क्विंटल सरसों मंडी बेच चुका है।