- शहद तगड़ा इम्यूनिटी बूस्टर है। सरसों के फूलों के सहारे हो रहा मधुमक्खी पालन। बिहार के हैं ज्यादातर मधुमक्की पालक
मुरैना. शहद तगड़ा इम्यूनिटी बूस्टर है। इसकी डिमांड लगातार बढ़ रही है। किसी दौर में मधुमक्खियों के नैचुरल छत्तों को तोडकऱ घंटों के इंतजार के बाद उनका शहद जुटाया जाता था। जंगली इलाकों में रहने वाले जनजातीय लोग यह काम करते थे। अब शहद जुटाने का काम मधुमक्खी पालन के जरिए चंबल में भी किया जा रहा है।
मध्यप्रदेश में मुरैना शहद उत्पादन का गढ़ बन चुका है। सरसों के फूलों से होने वाला शहद लाजवाब होता है। स्वाद और गुण में बेस्ट क्वालिटी निकलती है। यही वजह है कि यहां जब सरसों की फसल होने वाली होती है तो बी कीपर्स यहां डेरा डाल देते हैं। जब तक सरसों नहीं होती तब तक शीशम और बेर का शहद जुटाया जाता है। पूरे प्रदेश में शहद का उत्पादन सबसे ज्यादा मुरैना जिले में हो रहा है, क्योंकि यहां सरसों की खेती भी सबसे ज्यादा है। जिले के अलावा राजस्थान, उत्तर प्रदेश के साहरनपुर से लेकर बिहार व पंजाब तक के किसान अपने-अपने बाक्स लेकर मुरैना में शहद उत्पादन के लिए आते हैं और कृषि विभाग व जिला प्रशासन इन्हें बाक्स रखने के लिए जमीन तक मुहैया कराता है।