ग्राम पंचायत महुआ के हिंगोटियाई में जिस जमीन को निजी बताकर सडक़ निर्माण अधूरा छोड़ा, वह जमीन जांच में ग्राम आवादी की निकली, एक दर्जन लोगों ने सीएम हेल्पलाइन लगाई, सब इंजीनियर ने फर्जी जवाब भेजकर शिकायतें बंद कराई
मुरैना. जनपद पंचायत पोरसा की ग्राम पंचायत महुआ के हिंगोटियाई गांव में पंचायत के जिम्मेदारों ने स्वीकृत 110 मीटर रोड में से दो माह पूर्व सिर्फ 30 मीटर सडक़ का निर्माण कराया लेकिन गुणवत्ताहीन कार्य होने के चलते सडक़ धसक गई। आधा दर्जन ग्रामीणों ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की तो उपयंत्री ने फर्जी जवाब देकर फोर्सली शिकायत बंद करा दीं जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
हिंगोटियाई गांव में जनपद पंचायत ने 80 मीटर में सडक़ इसलिए नहीं बनाई कि यह निजी जमीन है। जब ग्रामीणों ने उसका सीमांकन कराया तो तहसीलदार पोरसा ने जांच उपरांत बताया कि उक्त जमीन किसी निजी संपत्ति न होकर ग्राम आवादी है, उसके बाद भी पंचायत ने सडक़ का निर्माण नहीं कराया है। यह सडक़ रविन्द्र सिंह के दरवाजे से राजेन्द्र सिंह के दरवाजे तक बनाई जानी थी।
पंचायत में हुए 90 लाख के फर्जीवाड़े में नहीं हुई जांच
ग्राम पंचायत महुआ में वर्ष 2024-25 में 23 तालाबों का कागजों में निर्माण 90 लाख रुपए का फर्जीवाड़ा कर दिया गया है। इसकी शिकायत ईओडब्ल्यू भोपाल, सीएम हेल्पलाइन सहित अन्य अधिकारियों से की जा चुकी है। इस मामले को पत्रिका ने उठाया तो जिला पंचायत सीईओ ने समिति बनाकर जांच के निर्देश दिए लेकिन एक माह बाद भी समिति जांच के लिए ग्राम पंचायत में नहीं पहुंची है। ग्राम पंचायत के पंच सदस्य रमेश सिंह तोमर हिंगोटियाई ने तालाब निर्माण के नाम पर बड़े स्तर पर हुए फर्जीवाड़ा की शिकायत की गई है। शिकायत यह भी थी कि जॉवकार्ड में मजदूरी महिलाओं के नाम दिखाई जा रही है जबकि फोटो पुरुष मजदूरों के अपलोड किए जा रहे हैं।
ग्राम पंचायत महुआ के रानू सिंह ने सीएम हेल्पलाइन क्रमांक 35371261, रीतेश ङ्क्षसह ने 35399086, सीताराम सिंह ने35503562, रन सिंह ने 35504161, जितेन्द्र ङ्क्षसह ने 35763625 एवं मुकेश तोमर ने शिकायत क्रमांक 35957261 पर दर्ज कराई लेकिन जनपद पंचायत के उपयंत्री ने फर्जी जवाब भेजकर इन शिकायतों को फोर्सली बंद करवा दिया।
यह बात सही है कि 110 मीटर सडक़ स्वीकृत हुई थी, उसमें से 30 मीटर का निर्माण कराया गया, लेकिन ट्रैक्टर निकलने से सडक़ धसक गई, दोबारा निर्माण कराया जा रहा है। निजी जमीन होने से अन्य सडक़ का निर्माण नहीं हो सका लेकिन तहसीलदार की जांच रिपोर्ट में आवादी की जगह बताई तो वहां सडक़ का निर्माण कराया जाएगा। यह बात सही है कि सीएम हेल्पलाइन मैंने ही बंद कराई हैं, ग्रामीणों से ही चर्चा के दौरान पता चला था कि वह निजी जमीन थी।