मुंबई

11 मिनट में 7 धमाके, 209 मौतें: मुंबई ट्रेन ब्लास्ट के 20 साल बाद भी अधूरा है इंसाफ; हाईकोर्ट से सभी 12 आरोपी हो चुके हैं बरी

7/11 Mumbai train blasts 20 years: 11 जुलाई 2006 को लोकल ट्रेनों में हुए 7 सिलसिलेवार धमाकों ने ली थी 209 बेगुनाहों की जान। दो दशक बाद भी पीड़ितों का इंसाफ अधूरा, पिछले साल बॉम्बे हाईकोर्ट से बरी हो चुके हैं सभी 12 दोषी। जानिए क्या था वो 11 मिनट का खौफनाक मंजर।
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Jul 11, 2026
Mumbai train blasts 20 years
मुंबई ट्रेन ब्लास्ट के 20 साल बाद भी अधूरा है इंसाफ!

Mumbai serial bomb blasts 2006: 11 जुलाई 2006, यह मुंबई के इतिहास का वह सबसे काला और खौफनाक दिन था, जिसने देश की आर्थिक राजधानी को खून के आंसुओं से नहला दिया था। आज इस वीभत्स आतंकी हमले को पूरे 20 साल हो चुके हैं। शाम के वक्त जब लाखों मुंबईकर अपने दफ्तरों से घर लौट रहे थे, तब महज 11 मिनट के भीतर हुए 7 सिलसिलेवार बम धमाकों ने हंसती-खेलती मायानगरी को श्मशान में तब्दील कर दिया था। इस कायरतापूर्ण हमले में 209 बेगुनाह लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि 700 से अधिक लोग जिंदगी भर के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से अपाहिज हो गए। दो दशक बीत जाने के बाद भी, इस भयावह शाम को अपनी आंखों से देखने वाले पीड़ित और उनके परिवार आज भी न्याय की उम्मीद में भटक रहे हैं।

शाम के वो खौफनाक 11 मिनट

11 जुलाई 2006 की शाम को रोजाना की तरह मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली 'वेस्टर्न रेलवे' की लोकल ट्रेनों में भारी भीड़ थी। आतंकवादियों ने जानबूझकर चर्चगेट से विरार की तरफ जाने वाली ट्रेनों के फर्स्ट क्लास (प्रथम श्रेणी) के डिब्बों को निशाना बनाया। इन डिब्बों में प्रेशर कुकर के भीतर भारी मात्रा में RDX और अमोनियम नाइट्रेट छिपाकर रखा गया था।

धमाकों का यह खूनी सिलसिला शाम 6:24 बजे शुरू हुआ और 6:35 बजे तक (महज 11 मिनट में) थम गया। इस दौरान मुंबई के माटुंगा रोड, माहिम जंक्शन, बांद्रा, सांताक्रुज (खार रोड के पास), जोगेश्वरी, बोरीवली, भायंदर (मीरा रोड के पास) इन 7 रेलवे स्टेशनों के पास खड़ी या गुजरती ट्रेनों में तबाही मच चुकी थी। ये धमाके इतने शक्तिशाली थे कि लोकल ट्रेनों की छतें हवा में उड़ गईं और लोहे के भारी-भरकम डिब्बे कागज की तरह फट गए। पटरियों पर चारों तरफ बिखरे हुए शव, खून से सने कपड़े और अपनों को ढूंढते लोगों की चीख-पुकार ने पूरी मुंबई को दहला दिया था।

जांच एजेंसियों का दावा

इस वीभत्स हमले की जांच महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) को सौंपी गई थी। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस पूरी साजिश के पीछे पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैबा (LeT) और प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) का हाथ था। आतंकियों ने मुंबई की गोवंडी झुग्गी बस्ती के एक छोटे से कमरे में इन प्रेशर कुकर बमों को असेंबल किया था, ताकि शहर में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई जा सके।

20 साल जेल में कटे, पर 2025 में सभी आरोपी हो गए बरी

इस मामले में सुरक्षा एजेंसियों ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। सितंबर 2015 में एक विशेष मकोका (MCOCA) अदालत ने फैसला सुनाते हुए 5 आरोपियों को मौत की सजा और 7 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

अदालत का हालिया फैसला

यह मामला पिछले साल (जुलाई 2025) तब एक बड़े कानूनी मोड़ पर आ गया, जब बॉम्बे हाईकोर्ट ने सबूतों की कमी और गवाहों के बयानों में विसंगतियों को देखते हुए विशेष अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया। हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार इस अपराध को 'संदेह से परे' साबित करने में पूरी तरह विफल रही है।

बरी होने से पहले इन आरोपियों ने करीब 20 साल जेल की सलाखों के पीछे बिताए थे। इनमें से एक आरोपी की कोविड-19 महामारी के दौरान जेल में ही मौत हो गई थी। हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन शीर्ष अदालत ने भी रिहाई के फैसले में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया।

तो फिर हमारी जान का दुश्मन कौन था?

अदालत से सभी 12 आरोपियों के बरी होने के बाद से पीड़ितों और उनके परिवारों के जख्म एक बार फिर हरे हो गए हैं। इस कानूनी मोड़ ने कई अनुत्तरित सवाल छोड़ दिए हैं। पीड़ितों का कहना है कि अगर ये 12 लोग गुनहगार नहीं थे, तो फिर उस दिन 209 बेगुनाहों को मौत के घाट उतारने वाले असली मास्टरमाइंड कौन थे?

धमाकों में गंभीर रूप से घायल हुए और स्थायी विकलांगता (Permanent Disability) का शिकार हुए दर्जनों लोग आज भी बिना किसी दीर्घकालिक सरकारी सहायता और आर्थिक मदद के बेहद दयनीय जीवन जीने को मजबूर हैं। 20 साल बाद भी मुंबई ट्रेन ब्लास्ट के पीड़ितों के लिए न्याय और पुनर्वास, दोनों ही अधूरे ख्वाब बनकर रह गए हैं।

Updated on:
11 Jul 2026 02:57 pm
Published on:
11 Jul 2026 02:57 pm
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