Sahar Shaikh vs Jitendra Awhad: कलवा-मुंब्रा की राजनीति पर नजर डालें तो यह इलाका लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) के विधायक जितेंद्र आव्हाड का गढ़ माना जाता रहा है। हालांकि इस बार दोनों एनसीपी गुटों में वोटों के बंटवारे का सीधा फायदा AIMIM को मिला।
महाराष्ट्र में हाल ही में संपन्न हुए महापालिका चुनावों के नतीजों ने कई जगहों पर सभी को चौंका दिया है। इन चुनावों में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) के प्रदर्शन ने खास तौर पर राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है। राज्य की 29 में से 13 महापालिकाओं में AIMIM ने कुल 125 सीटें जीतकर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। ठाणे नगर निगम में भी पार्टी के 14 उम्मीदवारों में से 5 ने जीत हासिल की है।
वरिष्ठ नेता शरद पवार के करीबी और कद्दावर नेता जितेंद्र आव्हाड के गढ़ माने जाने वाले मुंब्रा में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। यहां असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी (AIMIM) ने न सिर्फ अपनी ताकत बढ़ाई है, बल्कि आव्हाड के पुराने वफादार रहे यूनुस शेख की बेटी सहर शेख ने अपनी जीत के साथ ही सीधे जितेंद्र आव्हाड को चुनौती दे डाली है।
महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री आव्हाड पिछले 3 टर्म से मुंब्रा-कलवा क्षेत्र से विधायक हैं और इस इलाके की राजनीति में उनका प्रभाव लंबे समय से कायम रहा है। ठाणे के मुंब्रा क्षेत्र के प्रभाग क्रमांक 30 में AIMIM का पूरा पैनल चुना गया है, जो अब चर्चा का विषय बन गया है। जीत के तुरंत बाद नवनिर्वाचित नगरसेविका सहर यूनुसशेख के बयान ने सियासी माहौल गर्म कर दिया। उन्होंने कहा कि अगली चुनाव में पूरा मुंब्रा ‘हरा’ किया जाएगा।
सहर शेख का आक्रामक अंदाज
ठाणे नगर निगम (TMC) के वार्ड-30 से एआईएमआईएम का पूरा पैनल चुनकर आया है। जीत के बाद नवनिर्वाचित नगरसेविका सहर शेख ने विजय जुलूस निकाला, जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर जबरदस्त वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वह कहती नजर आ रही हैं, "अगले चुनाव में हम पूरे मुंब्रा को हरा कर देंगे। यहां से विरोधियों को भगा देंगे और मुंब्रा का हर जीतने वाला उम्मीदवार सिर्फ और सिर्फ एआईएमआईएम का होगा।" उनके इस बयान ने मुंब्रा की राजनीति में खलबली मचा दी है, क्योंकि मुंब्रा को सालों से एनसीपी शरद पवार गुट का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता रहा है।
कौन हैं सहर शेख? जिन्होंने आव्हाड को दी चुनौती
सहर शेख मुंब्रा की राजनीति में एक उभरता हुआ युवा चेहरा बनकर उभरी हैं। वह जितेंद्र आव्हाड के कभी बेहद खास रहे यूनुस शेख की बेटी हैं। यूनुस शेख और आव्हाड के बीच वर्षों पुरानी दोस्ती थी, जो अब कट्टर दुश्मनी में बदल चुकी है। सहर ने सोशल मीडिया के जरिए युवाओं और महिलाओं के बीच अपनी खास पहचान बनाई। उनकी रैलियां और भाषण सोशल मीडिया पर इतने वायरल हुए कि उन्होंने विपक्षी पार्टियों के पसीने छुड़ा दिए। सहर का पूरा पैनल भारी मतों के अंतर से जीता है।
एनसीपी की आपसी जंग का AIMIM को फायदा
मुंब्रा और कलवा में एनसीपी के दो गुट (शरद पवार बनाम अजित पवार) होने का सीधा फायदा ओवैसी की पार्टी को मिला। आंकड़ों के मुताबिक, पिछली बार मुंब्रा में AIMIM के केवल 2 नगरसेवक थे, लेकिन इस बार यह संख्या बढ़कर 5 हो गई है। सहर के साथ नफीस अंसारी, शेख सुलताना और डोंगरे शोएब फरीद ने भी शानदार जीत दर्ज की है।
यूनुस शेख का आव्हाड पर हमला
जीत के बाद केवल सहर ही नहीं, बल्कि उनके पिता यूनुस शेख ने भी जितेंद्र आव्हाड पर सीधा हमला बोला। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, मुझसे पंगा मत लेना, वरना मैं हालत खराब कर दूंगा। जिन्हें साथ लेकर घूमते हो, वे कुछ नहीं हैं, यहां सब शेर बैठे हैं। अगर हमारे बीच आए तो परिणाम गंभीर होंगे। इस तीखी बयानबाजी ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में मुंब्रा में जितेंद्र आव्हाड और शेख पिता-पुत्री के बीच की राजनीतिक जंग और भी दिलचस्प होने वाली है।