संस्था ने बांटी एक लाख बोतल दवाई आयुष मंत्रालय ने दी है सलाह
मुंबई. कोई भी बीमारी इंसान पर तभी हावी होती है, जब उसके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ती है। जब तक दवाई और वैक्सीन नहीं ईजाद नहीं हो जाती है तब तक कोरोना से बचाव के लिए हमारी पुरातन चिकित्सा पद्धितयों के मूल मंत्र पर अमल किया जा सकता है।
आरजू स्वाभिमान नागरी समिति नामक संस्था इसी सिद्धांत पर काम कर रही है। कोरोना से बचाव के लिए यह संस्था मुंबई के विभिन्न परिसरों में होम्योपैथी की एक लाख बोतल दवाई (अर्सेनिक अल्बम 30) वितरित कर चुकी है।
संस्था के संचालक राजेंद्र मेहता ही नहीं उनके घर की महिलाएं और बच्चे भी इस काम में जुटे हैं। संस्था के सदस्य महानगर के अलग-अलग हिस्सों में लोगों तक यह दवाई पहुंचा रहे हैं। मेहता का कहना है कि पूरे महानगर में यह दवाई बांटने में 10 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी कोरोना से बचाव के लिए इस दवाई के इस्तेमाल की सलाह दी है। कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए बीएमसी सामाजिक संस्थाओं की मदद से यह दवाई लोगों तक पहुंचा रही है।
समस्या यह है कि बीएमसी के पास होम्योपैथी की दवाओं के लिए फंड नहीं है। इसलिए सामाजिक संस्थाओं की मदद से यह दवाई वितरित की जा रही है। आरजू स्वाभिमान नागरी समिति एक तरह से बीएमसी की मदद कर रही है।
मेहता ने बताया कि संस्था के लोग हमारे परिवार का हिस्सा हैं। मेरे भाई डॉक्टर हैं, जो दवाई बनाते हैं। परिवार के अन्य लोग यह दवाई जरूरतमंदों तक पहुंचाते हैं।
तीन दिन का कोर्स
मेहता ने बताया कि कोरोना से बचाव के लिए तीन दिन का कोर्स किया जा सकता है। कोर्स पूरा होने के बाद कोरोना संक्रमण के खतरे से बच सकते हैं। हर महीने तीन दिन यह दवाई ले सकते हैं। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है।
ऐसे करें उपयोग
सुबह बिना ब्रश किए खाली पेट अर्सेनल अल्बम 30 की चार गोली जीभ के नीचे रख लें। पांच साल से कम उम्र के बच्चों को दो गोली दी जा सकती है। इसके बाद आधे घंटे तक कुछ खाएं-पीएं नहीं। हर महीने तीन दिन यह डोज लेनी है।